किराएदारों की एक गलती और ₹1 लाख की चपत! ₹50,000+ रेंट वालों पर आयकर विभाग की पैनी नजर

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 12:43 PM

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अगर आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में एक शानदार फ्लैट में रहते हैं और उसका किराया ₹50,000 प्रति माह की सीमा को पार कर चुका है, तो यह खबर सीधे आपसे जुड़ी है। अक्सर हम मानते हैं कि टैक्स का झंझट सिर्फ मकान मालिक का होता है, लेकिन आयकर...

Income Tax New Rules for Tenants: अगर आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में एक शानदार फ्लैट में रहते हैं और उसका किराया ₹50,000 प्रति माह की सीमा को पार कर चुका है, तो यह खबर सीधे आपसे जुड़ी है। अक्सर हम मानते हैं कि टैक्स का झंझट सिर्फ मकान मालिक का होता है, लेकिन आयकर विभाग के नियम कुछ और ही कहते हैं। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 194-IB के अनुसार, यदि आपका मासिक किराया ₹50,000 से अधिक है, तो टैक्स (TDS) काटने और उसे सरकार तक पहुंचाने की कानूनी जिम्मेदारी मकान मालिक की नहीं, बल्कि आपकी यानी 'किराएदार' की है।

सरकार ने क्यों बनाया यह नियम और क्या है गणित?

अक्सर लोग टैक्स बचाने के लिए भारी-भरकम HRA (मकान किराया भत्ता) क्लेम तो कर लेते हैं, लेकिन कई मकान मालिक उस किराए को अपनी इनकम में नहीं दिखाते। इसी 'मिसमैच' को पकड़ने के लिए साल 2017 में यह नियम लाया गया था। बजट 2024 में सरकार ने किराएदारों को थोड़ी राहत देते हुए TDS की दर को 5% से घटाकर 2% कर दिया है। यानी अगर आप किराया दे रहे हैं, तो आपको कुल किराए का 2% हिस्सा काटकर बाकी पैसा मकान मालिक को देना होगा। हालांकि, यहां एक बड़ा पेंच है—अगर आपके मकान मालिक के पास PAN कार्ड नहीं है, तो आपको 2% नहीं बल्कि सीधा 20% TDS काटना पड़ेगा।

समय सीमा और जमा करने का तरीका

आपको हर महीने टैक्स काटने की जरूरत नहीं है। यह प्रक्रिया वित्त वर्ष के आखिरी महीने (मार्च) में या घर खाली करते समय पूरी करनी होती है। उदाहरण के लिए, मार्च 2026 में काटा गया TDS आपको 30 अप्रैल 2026 तक सरकारी खजाने में जमा करना अनिवार्य है। टैक्स जमा करने के बाद आपको 'फॉर्म 16C' जनरेट करके अपने मकान मालिक को देना होगा, जो उनके लिए टैक्स भुगतान का प्रमाण होगा।

लापरवाही का अंजाम: भारी जुर्माना और कानूनी पेच

इस नियम को हल्के में लेना आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ सकता है। यदि आप TDS रिटर्न फाइल नहीं करते हैं, तो सेक्शन 271H के तहत आप पर ₹1,00,000 तक का जुर्माना लग सकता है। इतना ही नहीं, देरी होने पर ₹200 प्रतिदिन की लेट फीस और टैक्स न काटने पर 1% से 1.5% तक का मासिक ब्याज भी देना होगा। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर आपने TDS नहीं काटा, तो आयकर विभाग उस बकाया टैक्स की वसूली मकान मालिक से नहीं, बल्कि सीधे आपसे यानी किराएदार से करेगा।

सुरक्षित रहने के लिए किराएदार क्या करें?

मुसीबत से बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि घर किराए पर लेते समय ही मकान मालिक से उनका PAN कार्ड जरूर मांगें। यदि किराया ₹50,000 से ऊपर है, तो भुगतान करते समय TDS की राशि घटाकर ही ट्रांसफर करें। थोड़ी सी यह जागरूकता आपको आयकर विभाग के नोटिस और भारी-भरकम पेनल्टी से बचा सकती है।

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