शिमला समझौता करने वाले PAK प्रधानमंत्री के प्राइवेट पार्ट की फोटो क्यों खींची गई थी? जानें सबकुछ

Edited By Updated: 26 Apr, 2025 11:45 AM

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जिस नेता ने भारत के साथ ऐतिहासिक शिमला समझौता किया था, उसी पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को बाद में फांसी पर लटका दिया गया। लेकिन फांसी से भी ज्यादा चौंकाने वाली बात ये थी कि उनकी मौत के बाद उनके प्राइवेट पार्ट की...

इंटरनेशनल डेस्क: जिस नेता ने भारत के साथ ऐतिहासिक शिमला समझौता किया था, उसी पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को बाद में फांसी पर लटका दिया गया। लेकिन फांसी से भी ज्यादा चौंकाने वाली बात ये थी कि उनकी मौत के बाद उनके प्राइवेट पार्ट की तस्वीरें खींची गईं। आखिर ऐसा क्यों किया गया? क्या इसके पीछे कोई धार्मिक वजह थी या ये सिर्फ सत्ता की साजिश का हिस्सा था? इस रिपोर्ट में जानिए भुट्टो की गिरफ्तारी से लेकर फांसी और उस फोटो तक की पूरी कहानी।
पाकिस्तान के पहले लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को 4 अप्रैल 1979 को फांसी दे दी गई। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने एक राजनीतिक विरोधी की हत्या करवाई थी। भुट्टो ने 14 अगस्त 1973 से 5 जुलाई 1977 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था। बाद में जनरल ज़िया-उल-हक़ ने उनके खिलाफ तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली थी।

 

फांसी पर क्यों लटकाया गया था?

ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो पाकिस्तान के पहले लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री थे। लेकिन 1974 में लाहौर के एक विपक्षी नेता अहमद रज़ा कसूरी पर हमला हुआ, जिसमें उनके पिता की मौत हो गई। आरोप लगा कि ये हमला भुट्टो के इशारे पर हुआ था। 5 जुलाई 1977 को पाकिस्तान की सेना के जनरल मोहम्मद ज़िया-उल-हक ने भुट्टो सरकार को हटाकर देश में मार्शल लॉ लगा दिया। इसके बाद भुट्टो को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर हत्या की साजिश रचने का केस चला। भुट्टो के केस की सुनवाई सीधे लाहौर हाई कोर्ट में हुई, जहां उन्हें 18 मार्च 1978 को फांसी की सजा सुनाई गई। कहा जाता है कि यह फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया था, और ट्रायल में कई गड़बड़ियां हुईं। 3 अप्रैल 1979 को उन्हें बताया गया कि अगले दिन उन्हें फांसी दी जाएगी। और 4 अप्रैल की रात उन्हें रावलपिंडी जेल में फांसी दे दी गई। उनकी मौत के बाद भी उनका शव करीब 30 मिनट तक फांसी के फंदे पर लटकाया गया।

जेल में भुट्टो की हालत बेहद खराब थी

भुट्टो को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया जहां उन्हें बेहद सख्ती का सामना करना पड़ा। उनके करीबी सलमान तासीर ने लिखा कि जेल में भुट्टो को इतनी निगरानी में रखा गया था कि टॉयलेट जाते समय भी गार्ड्स साथ जाते थे। इससे भुट्टो को काफी शर्मिंदगी होती थी। उन्होंने खाना पीना तक छोड़ दिया ताकि उन्हें टॉयलेट जाने की ज़रूरत न पड़े। बाद में जेल प्रशासन ने उनके लिए अलग से टॉयलेट बनवाया। 3 अप्रैल की रात को भुट्टो को बताया गया कि अगली सुबह उन्हें फांसी दी जाएगी। रात के 2 बजकर 4 मिनट पर उन्हें फांसी पर लटकाया गया। कहा जाता है कि उस समय वह नशे में थे क्योंकि उन्हें दवा दी गई थी। आधे घंटे तक लटके रहने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।

मौत के बाद की गई शर्मनाक हरकत

भुट्टो की मौत के बाद एक खुफिया एजेंसी के फोटोग्राफर को बुलाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फांसी के बाद उनके प्राइवेट पार्ट की तस्वीरें ली गईं। इसका मकसद यह जांचना था कि क्या भुट्टो का इस्लामी रिवाज के मुताबिक खतना हुआ था या नहीं। तस्वीरों के ज़रिए इस बात की पुष्टि की गई कि वह मुसलमान थे।

भुट्टो की मौत: आज भी रहस्य

ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को फांसी देने के पीछे के राजनीतिक कारणों पर आज भी बहस होती है। कुछ लोग इसे जनरल ज़िया-उल-हक की सत्ता की साजिश मानते हैं। वहीं भुट्टो की मौत के बाद की गई फोटोग्राफी ने इस घटना को और विवादित बना दिया।

 

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