AI Teacher: जहां नहीं पहुंचा 5G, वहां पहुंची AI टीचर, बदला बच्चों का भविष्य

Edited By Updated: 18 Apr, 2025 05:49 PM

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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में नेपाल बॉर्डर के पास एक छोटा सा गांव है – जाजर चिंगरी। यहां के सरकारी प्राइमरी स्कूल में एक अनोखी टीचर बच्चों को पढ़ा रही है, जिसका नाम है AI रोबोट टीचर 'इको'।

नेशनल डेस्क : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में नेपाल बॉर्डर के पास एक छोटा सा गांव है – जाजर चिंगरी। यहां के सरकारी प्राइमरी स्कूल में एक अनोखी टीचर बच्चों को पढ़ा रही है, जिसका नाम है AI रोबोट टीचर 'इको'। इस रोबोट को देखने के लिए गांव के बच्चे ही नहीं, बड़े-बुजुर्ग भी स्कूल पहुंच रहे हैं। यह शायद देश का पहला सरकारी स्कूल है जहां कोई AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टीचर पढ़ा रही है।

कैसे आई ये रोबोट टीचर?

यह गांव पिथौरागढ़ से करीब 40 किलोमीटर दूर है और यहां मोबाइल नेटवर्क की भी काफी दिक्कत होती है। 4G और 5G की सुविधा ठीक से नहीं है। इसके बावजूद यहां एक रोबोट टीचर का होना सबको हैरान कर रहा है।

इस अनोखी पहल के पीछे हैं स्कूल के एक शिक्षक – चंद्रशेखर जोशी। उन्होंने खुद अपने दम पर इस रोबोट को तैयार किया। उन्होंने 4 लाख रुपये खर्च करके इस AI टीचर 'इको' को बनाया। ये रोबोट बच्चों के हर सवाल का तुरंत जवाब देती है और स्कूल के बरामदे में पढ़ाती है, जहां थोड़ा अच्छा इंटरनेट सिग्नल मिल जाता है।

कहां से मिला आइडिया?

जोशी जी को यह आइडिया चीन में रहने वाले एक इंजीनियर दोस्त से मिला। उनके दोस्त ने तीन हिस्सों में रोबोट के पार्ट्स भेजे और वॉट्सएप पर गाइड करके रोबोट को असेंबल करवाया।

जोशी की मेहनत ने गांव के बच्चों की पढ़ाई को आसान बना दिया है। आज जाजर चिंगरी गांव का यह स्कूल पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है। जानकारों का मानना है कि ये तरीका उन स्कूलों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है जहां शिक्षकों की कमी है।

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