इस देश में 20 साल से पहले ही मां बन रही बड़ी संख्या में लड़कियां, फर्टिलिटी रेट सुनकर दंग रह जाएंगे आप...

Edited By Updated: 28 Nov, 2025 05:02 PM

large number of girls in this country are becoming mothers before the age of 20

अफगानिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां लड़कियों का कम उम्र में मां बनना आम है। यहां पहली बार मां बनने की औसत उम्र 19.9 वर्ष है, जबकि कई समुदायों में यह उम्र इससे भी कम रहती है। देश का फर्टिलिटी रेट 4.84 है, जो वैश्विक स्तर पर काफी ऊंचा...

नेशनल डेस्क : अफगानिस्तान उन देशों में शामिल है जहां लड़कियों का कम उम्र में मां बनना आम बात है। सामाजिक परंपराएं, आर्थिक मजबूरियां, शिक्षा की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव मिलकर ऐसी स्थिति बनाते हैं कि कई लड़कियां किशोरावस्था में ही मातृत्व संभाल लेती हैं। अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक अफगानिस्तान में पहली बार मां बनने की औसत उम्र 19.9 वर्ष है, यानी ज्यादातर लड़कियां 20 साल से पहले ही बच्चा जन्म देती हैं। कई क्षेत्रों में यह उम्र इससे भी कम पाई जाती है।

अब भी बहुत ऊंची है प्रजनन दर

अफगानिस्तान की प्रजनन दर दुनिया में सबसे ऊंची दरों में से एक है। यहां एक महिला औसतन 4.84 बच्चे जन्म देती है। 1960 में यह दर 7.28 थी, जो अब भले कम हुई है, लेकिन अभी भी अत्यधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके धीमे सुधार की वजह से भविष्य में भी जन्मदर में तेजी से गिरावट की उम्मीद नहीं है।

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आबादी तेज़ी से बढ़ रही है

देश की आबादी में तेज बढ़ोतरी भी बड़ी चिंता है। केवल 2022 से 2023 के बीच जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या, मौतों की तुलना में 12 लाख 28 हजार अधिक थी। इससे अफगानिस्तान की जनसंख्या में लगभग 3% की वृद्धि दर्ज की गई। लगातार बढ़ती आबादी देश की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य तंत्र और सामाजिक संरचना पर भारी दबाव डाल सकती है।

किशोरावस्था में मातृत्व भी चिंता का विषय

1960 में 15–19 वर्ष की लड़कियों में जन्मदर 140.6 प्रति 1000 थी, जो 2023 में घटकर 64.1 प्रति 1000 हो गई। यह गिरावट सकारात्मक है, लेकिन दर अब भी सामान्य से काफी अधिक है। यही वजह है कि 2024 में देश की कुल आबादी का लगभग 24% हिस्सा प्रजनन आयु वाली महिलाओं का है।

तालिबान शासन में महिलाओं की स्थिति और खराब

तालिबान के सत्ता में आने के बाद महिलाओं के अधिकारों पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा पर भारी रोक लगी है और उन पर कई सख्त नियम लागू किए गए हैं। ऐसे हालात मातृत्व आयु, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति पर और अधिक नकारात्मक असर डाल रहे हैं।

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