Edited By Pardeep,Updated: 04 Mar, 2026 02:47 AM

अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। अब हमले सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि डिजिटल ढांचे (डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर) को भी निशाना बनाया जा रहा है।
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। अब हमले सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि डिजिटल ढांचे (डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर) को भी निशाना बनाया जा रहा है।
टेक कंपनी Amazon ने जानकारी दी है कि यूएई और बहरीन में उसके तीन बड़े डेटा सेंटर्स ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं। इन हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में क्लाउड सर्विस और कंप्यूटिंग सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे बैंकिंग, शेयर बाजार और रोजमर्रा की डिजिटल सेवाएं ठप हो गई हैं।
UAE और 🇧🇭 बहरीन के डेटा सेंटर्स पर हमला
एमेजॉन के मुताबिक, यूएई में उसके दो बड़े डेटा सेंटर्स पर रविवार को सीधे ड्रोन अटैक हुए। हालांकि कंपनी ने यह साफ नहीं किया कि ये हमले किसने किए। इसके अलावा बहरीन में स्थित कंपनी के डेटा सेंटर के पास हुए एक बड़े धमाके से इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। कंपनी का कहना है कि नुकसान काफी बड़ा है। मरम्मत का काम शुरू हो गया है, लेकिन सेवाएं पूरी तरह बहाल होने में लंबा समय लग सकता है।
AWS ठप, डिजिटल सेवाओं पर असर
इन हमलों के कारण Amazon Web Services (AWS) की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। AWS का इस्तेमाल बैंक, एयरलाइंस, शेयर बाजार, सरकारी दफ्तर और बड़ी कंपनियां अपने डेटा स्टोर करने और ऑनलाइन सेवाएं चलाने के लिए करती हैं। जब क्लाउड सर्विस बंद हुई, तो कई डिजिटल सिस्टम काम करना बंद कर गए।
शेयर बाजार बंद, एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी
तकनीकी खराबी और इंटरनेट सेवाओं में रुकावट के कारण यूएई के शेयर बाजार को सोमवार और मंगलवार दोनों दिन बंद रखना पड़ा। साथ ही दुबई और कुवैत के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंस गए। उड़ानों का संचालन और यात्रियों के डेटा मैनेजमेंट में भारी दिक्कतें आईं, क्योंकि एयरलाइंस का सिस्टम AWS पर निर्भर था।
युद्ध नीति में बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला युद्ध की रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाता है। पहले हमले मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों पर होते थे, लेकिन अब दुश्मन देश की डिजिटल रीढ़ पर हमला किया जा रहा है। आज की दुनिया पूरी तरह इंटरनेट, डेटा और क्लाउड सिस्टम पर निर्भर है। ऐसे में डेटा सेंटर्स को निशाना बनाकर किसी देश की अर्थव्यवस्था, सैन्य संचार, बैंकिंग और नागरिक सेवाओं को एक ही झटके में पंगु बनाया जा सकता है।
टेक्नोलॉजी हब बने “सॉफ्ट टारगेट”
मिडिल ईस्ट को पहले सिर्फ तेल सप्लाई के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बड़े निवेश का केंद्र बन चुका है। Google और Microsoft जैसी कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश किया है और आगे भी बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। सऊदी अरब और यूएई में बन रहे नए टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर अब युद्ध के “सॉफ्ट टारगेट” बन गए हैं। इन पर हमला करना आसान है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा और दूरगामी होता है।