Edited By ,Updated: 05 Feb, 2026 05:53 AM

जब मैं 2013 में अमरीका में इसराईल का राजदूत बना, तो मेरी पत्नी और मैं 5 बच्चों के साथ वाशिंगटन डी.सी. पहुंचे, जिनकी आयु 10 वर्ष से कम थी, जिनमें एक 2 वर्ष का लड़का और 4 महीने की एक बच्ची भी शामिल थी। हम एक ऑ पेयर (देखभाल सहायक) नियुक्त करने की आशा...
जब मैं 2013 में अमरीका में इसराईल का राजदूत बना, तो मेरी पत्नी और मैं 5 बच्चों के साथ वाशिंगटन डी.सी. पहुंचे, जिनकी आयु 10 वर्ष से कम थी, जिनमें एक 2 वर्ष का लड़का और 4 महीने की एक बच्ची भी शामिल थी। हम एक ऑ पेयर (देखभाल सहायक) नियुक्त करने की आशा कर रहे थे, ताकि मेरी पत्नी राजदूत की पत्नी होने से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा सकें, जिनमें हमारे आधिकारिक निवास पर कार्यक्रमों की मेजबानी करना, वाशिंगटन डी.सी. में विभिन्न समारोहों में भाग लेना तथा राजधानी से बाहर की यात्राओं में मेरे साथ जाना शामिल था।
हमारे दूतावास में मेरे एक सहकर्मी ने मुझे बताया कि उसके भारतीय ऑ पेयर की बहन, हेलेन नाम की एक महिला, भी अमरीका आकर काम करने में रुचि रखती है। हालांकि मेरी पत्नी किसी अनजान व्यक्ति को अपने घर में लाने को लेकर ङ्क्षचतित थीं, फिर भी हमने हेलेन पर भरोसा करने का निर्णय लिया।
हेलेन हमारे लिए सचमुच किसी वरदान से कम नहीं साबित हुई-वह एक बुद्धिमान, दयालु और भरोसेमंद महिला थीं, जिन्होंने हमारे बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वे उनके अपने हों। हेलेन ने हमारे परिवार की सबसे कठोर आलोचक, मेरी मां का भी सम्मान और विश्वास अर्जित कर लिया। लेकिन समय के साथ, हेलेन के लिए अपने पति विनय और अपनी बेटी रोशनी से दूर रहना और अधिक कठिन होता गया। रोशनी केवल 12 वर्ष की थी, जब हेलेन भारत छोड़कर अमरीका आई थीं, ताकि अपनी बेटी के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकें। जब 2021 में वाशिंगटन में मेरा 7 वर्षों से अधिक का कार्यकाल समाप्त हुआ, तो हमने हेलेन से पूछा कि क्या वह इसराईल लौटकर मेरी मां की देखभाल में हमारी सहायता करने को तैयार होंगी, जिन्हें स्ट्रोक आया था? हेलेन ने एक बार फिर सहमति दी और इस तरह फिर से अपने परिवार से दूर हो गईं।
हमारे बच्चों की 7 वर्षों तक देखभाल करने के बाद, हेलेन ने अगले 4 वर्षों तक मेरी मां की सेवा की, जिनका पिछले वर्ष मई में निधन हो गया। मैं हमेशा इस बात के लिए कृतज्ञ रहूंगा कि हेलेन ने मेरी मां के अंतिम वर्षों में उन्हें कितनी गरिमा और सम्मान के साथ संभाला। इसलिए जब हेलेन ने हमें रोशनी की शादी के लिए भारत आमंत्रित किया, तो हमारे मन में कोई संदेह नहीं था कि हम अवश्य वहां जाकर उनके साथ इस उत्सव में शामिल होंगे। इसी प्रकार मैं, मेरी पत्नी और हमारे 3 बच्चे कर्नाटक के अम्टाडी गांव में पहुंचे-इस अद्भुत देश की अपनी पहली यात्रा पर। उस 10 दिनों की यात्रा में अनेक अविस्मरणीय अनुभव शामिल थे-ताजमहल की अतुलनीय भव्यता, कूर्ग के हरे-भरे कॉफी बागान, राजस्थान में बाघ सफारी, मंगलुरु की मंत्रमुग्ध कर देने वाली जयलक्ष्मी साड़ी की दुकान और हर जगह मिले अद्भुत तथा आत्मीय लोग।
मुझे वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से मिलने का भी अवसर मिला, जिनमें आपके अनुभवी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और आपके अथक विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर शामिल थे। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत और इसराईल के बीच रणनीतिक सांझेदारी अभूतपूर्व रूप से विस्तारित होगी। लेकिन भारत की मेरी पहली यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण अम्टाडी में बिताया गया समय था, जिसकी शुरुआत गुरुवार रात रोसे समारोह से हुई और अगले रविवार विवाह समारोह के साथ समाप्त हुई। हमने इतने सारे अलग-अलग अनुष्ठान देखे कि सबका हिसाब रखना कठिन था, पर एक बात हर अनुष्ठान में स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई-परिवार की केंद्रीय भूमिका। जब सैंकड़ों लोग रोशनी पर नारियल का दूध डालते हुए अपना आशीर्वाद दे रहे थे, तब मुझे महसूस हुआ कि यह केवल 2 व्यक्तियों का विवाह नहीं, बल्कि 2 परिवारों और 2 समुदायों का मिलन था।
मुझे पता है कि भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करनी है। उसे विकास की गति के साथ तालमेल रखने के लिए आधारभूत ढांचे का विस्तार करना है। उसे यह सुनिश्चित करना है कि एक शिक्षित, मेहनती और उद्यमशील कार्यबल को ऐसे अच्छे अवसर मिलें, जिससे उसकी प्रतिभाशाली मानव पूंजी देश की सीमाओं के भीतर ही बनी रहे। उसे प्रदूषण कम करना है, गरीबी दूर करनी है और उन असंख्य समस्याओं से निपटना है, जिनका सामना एक तीव्र गति से विकसित हो रहा राष्ट्र करता है। फिर भी मैं भारत का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल देखता हूं, और इसका कारण वही है जो मैंने रोशनी की शादी में देखा। परिवार, जो हर मजबूत समाज की मूल इकाई है, दुनिया के कई हिस्सों में दबाव में है। लेकिन भारत में परिवार अब भी मजबूत है।
परिवार ही वह कारण है जिसने हेलेन जैसी महिला को वर्षों तक विदेश में काम करने के लिए प्रेरित किया, ताकि वह अपनी बेटी को बेहतर भविष्य दे सके। परिवार ही वह आधार है, जिसने हेलेन के भाई-बहनों और रिश्तेदारों को आगे बढ़कर रोशनी की परवरिश में सहायता करने के लिए प्रेरित किया, जब उसकी मां दूर थी। यही वह शक्ति है जो अटूट संबंधों और शाश्वत मूल्यों को जन्म देती है, जो सुदृढ़ समुदायों और सफल राष्ट्रों का निर्माण करती है। कई लोग इस बात पर बहस करते हैं कि 21वीं सदी अमरीकी सदी होगी या चीनी सदी। आने वाले दशकों में यदि भारत इन दोनों की छाया से उभरकर सामने आए, तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो यह अम्टाडी जैसे स्थानों और हेलेन जैसे लोगों के कारण होगा। यह इसलिए होगा क्योंकि परिवार में निहित एक प्राचीन सभ्यता, जो भविष्य को अपनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, ऐसा राष्ट्र है जिसके लिए संभावनाओं की कोई सीमा नहीं है। (लेखक इसराईल के रणनीतिक मामलों के मंत्री (2022-2025) तथा अमरीका में इसराईल के राजदूत (2013-2021) रह चुके हैं)-रॉन डर्मर