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11 अक्तूबर को खैबर पख्तूनख्वा (के.पी.के.) में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू किए जाने को इस्लामाबाद द्वारा मुख्य रूप से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और...
27 अक्तूबर, 2026 को बाबासाहेब आंबेडकर की जालंधर की युगप्रवर्तक यात्रा के 75 वर्ष पूरे हो गए। यह बड़े सम्मान और गर्व की बात है कि इस यात्रा के दौरान...
व्हाट्सऐप पर संदेश फॉरवर्ड करने वाला व्यक्ति हर सुबह एक उद्देश्य के साथ जागता है। जब हममें से बाकी लोग दांत साफ कर रहे होते हैं और यह सोच रहे होते...
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल, जिन्होंने चार वर्षों तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के बाद शीर्ष अदालत के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के...
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हर साल मानसून हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य हिमालयी क्षेत्रों में हरी-भरी घाटियों, भरी हुई नदियों और शानदार परिदृश्यों के वादे के साथ आता है और हर साल लगभग एक जानी-पहचानी पटकथा की तरह, वही त्रासदी सामने आती है-सड़कें भूस्खलन के नीचे गायब हो जाती हैं, पुल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, नदियां खतरनाक रूप से उफनने लगती हैं, पर्यटक फंस जाते हैं और संवेदनशील ढलानों पर रहने वाले परिवार रातें जागकर यह सोचते हुए बिताते हैं कि उनके ऊपर का पहाड़ टिकेगा या नहीं।
साल की सबसे बड़ी राजनीतिक फिल्म एक ओडिसी (महाकाव्य यात्रा) की कहानी बयां करती है कि निर्वासन में जी रहा एक अनुभवी योद्धा, अपने परिवार और देश लौटने को बेताब, नरसंहार, प्रतिशोध और विद्रोह के बीच असंभव बाधाओं से जूझती सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व करता है। नहीं, यह क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ नहीं, बल्कि ला बटाईल डी गॉल है-चाल्र्स डी गॉल पर आधारित दो भागों वाला द्वितीय विश्व युद्ध का एक ड्रामा, जिसने चुनावों से एक साल पहले फ्रांस में तहलका मचा दिया है। 320 मिनट की अवधि वाली इस जोड़ीदार फिल्म ने फ्र
80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार अपनी विचारधारा ‘सप्तधारा’ में देश के मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर से लेकर कृषि, टैक्नोलॉजी, गति यानी कनैक्टिविटी, डिफैंस, ग्रीन एवं ब्लू इकॉनोमी और सातवें स्तंभ के तौर पर सॉफ्ट स्किल्स का विशेष उल्लेख किया। यह देश के समावेशी विकास में भौतिक एवं आध्यात्मिक संतुलन साधने के लिए प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक एवं दूरदर्शी दृष्टिकोण का अनूठा संगम है।
भारत जब स्वतंत्र हुआ था, तब देश की सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी स्थिति इतनी कमजोर थी कि अंतरिक्ष अनुसंधान जैसी अवधारणा केवल एक स्वप्न लगती थी।
अंकारा रियाद और इस्लामाबाद के अधिकारी जब एक नई त्रिपक्षीय धुरी, मक्का संयुक्त रक्षा समझौते, के गुणों का बखान करते हैं, तो किसी को भी गहरा ‘डेजा वू’ (पूर्वानुभव) महसूस हो सकता है। यह समझौता पश्चिम एशिया में पाकिस्तान के रणनीतिक प्रयासों के एक लंबे और काफी हद तक विडंबनापूर्ण इतिहास का एक नया अध्याय है
योगेंद्र यादव ने यह तर्क दिया था ‘जाति जनगणना समाप्त हो चुकी है। किसी औपचारिक घोषणा या अंतिम संस्कार की उम्मीद न करें’, (इंडियन एक्सप्रैस, 12 अगस्त) कि जाति जनगणना की कवायद को एक तकनीकी विकल्प द्वारा चुपचाप खत्म कर दिया गया है। जनगणना जिसमें प्रत्येक भारतीय से अपनी जाति का नाम बताने को कहा गया, जिसके परिणामस्वरूप 2011 में 47 लाख जातियों के नाम सामने आए और इसे आसानी से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। राजनीति के बारे में उनका विश्लेषण काफी हद तक ठोस प्रतीत होता है। लेकिन इसके स्थान पर ‘ड्रॉप-डाऊन म
कांग्रेस ने पेपर लीक और राम मंदिर के दान से जुड़े कथित चंदा चोरी पर राष्ट्रव्यापी अभियान घोषित किया। पार्टी की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था ने यह भी संकल्प लिया कि उसके कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ने अपने रुख का समर्थन करने के लिए 1937 के सी.डब्ल्यू.सी. प्रस्ताव का हवाला दिया और तर्क दिया कि महात्मा गांधी और रबींद्रनाथ टैगोर सहित स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं ने वंदे मातरम की सार्वजनिक प्रस्तुति को पहले दो छंदों
देश के किसी भी पैट्रोल पंप पर आज जो ईंधन गाड़ी की टंकी में उतरता है, उसका पांचवां हिस्सा दरअसल खाड़ी के किसी तेल के कुएं से नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के किसी गन्ने के खेत या उत्तर प्रदेश के मक्के के खलिहान से आता है।
हकीकत क्या है : सरकार तय करती है कि क्या पढ़ाया जाएगा और किन परीक्षाओं के जरिए उसे परखा जाएगा, माता-पिता तय करते हैं कि उस पढ़ाई का अंत किस मुकाम पर होना चाहिए और विद्यार्थी वह व्यक्तिहै जिसे इन दोनों के फैसलों के बीच अपनी पूरी जिंदगी जीनी होती है।
पंजाब के किसान आंदोलन को समझने के लिए 2021 और 2024 के दोनों चरणों को एक साथ देखना जरूरी है। जून 2020 में केंद्र सरकार द्वारा 3 कृषि कानूनों के पारित होने के बाद अगस्त में धरनों और सितम्बर में रेल रोको के आह्वान के साथ शुरू हुआ किसान आंदोलन नवम्बर 2020 में किसान संगठनों द्वारा ‘दिल्ली चलो’ कार्यक्रम के साथ आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य तीनों कृषि कानूनों को वापस करवाना था।
ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म ‘नक्सलवादी’, जो नक्सलवादी चारू मजूमदार की बायोपिक के रूप में बनाई गई थी, से लेकर हाल ही में बनी ‘लाल सलाम’ और ‘टैंगो चार्ली’ तक सैंकड़ों ऐसी फिल्में बनीं, जिनमें हथियारबंद नक्सलियों के पक्ष में नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई थी।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डी.डी.ए.) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। 50 साल से अधिक पुराने, व्यक्तिगत प्लॉट पर बने दो-मंजिला डी.डी.ए. मकानों के पुनॢनर्माण और रीडिवैल्पमैंट के लिए एक समान नीति को मंजूरी दे दी गई है। दिल्ली की कई पुरानी कॉलोनियों के निवासियों के लिए यह लंबे समय से चली आ रही मांग का जवाब है। ये मकान 1962 के मास्टर प्लान के दौर में बने थे और अब संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुके हैं। मालिक अब मौजूदा मास्टर प्लान, एफ.ए.आर., ग्राऊंड कवरेज, ऊंचाई सीमा, स्ट्रक्चरल सेफ्टी और फायर से
सच -झूठ, अमीरी-गरीबी, उसूलपरस्ती और बेउसूली के दरमियान युद्ध युगों-युगों से जारी है। मानवीय इतिहास के समूचे कैनवस पर नजर मारने से यह भी स्पष्ट पता लग जाता है कि अनेकों सामयिक हारों और पिछडऩे के बावजूद इतिहास का पहिया हमेशा आगे की ओर ही बढ़ता रहा है। यह भी सच है कि हुक्मरानों ने सत्ता-विरोधी आवाजों को सदा ही जुल्म-ज्यादती से दबाना चाहा है। परंतु हक-सच के लिए लड़े जाने वाले युद्ध की महानता जब लोगों की सोच का स्थायी हिस्सा बन जाती है, तो अवाम हर कठिनाई और मुसीबत का सामना करते हुए सच की जीत का डंका
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में देशहित, समाजहित में चल रहे अनेक कल्याणकारी कार्यों और योजनाओं का जिक्र किया। वहीं विश्व की घटनाओं और आने वाली चुनौतियों का जिक्र भी किया। इसी के साथ उन्होंने नए तकनीकी और डिजिटल युग में नैरेटिव गढऩे के लिए इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग टूल्स को लेकर देशवासियों को सचेत भी किया। इसके लिए उन्होंने ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया, क्योंकि आज की लड़ाई जमीन पर नहीं, दिमाग से लड़ी जाती है।
एनालॉग पनीर के साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट अचानक चर्चा में है। बात सिर्फ पनीर में मिलावट की नहीं, बल्कि बात यह है कि पनीर के नाम पर जो परोसा जा रहा है वह दूध से बना पनीर ही नहीं है, वो एनालॉग पनीर है!
दिल्ली पुलिस ने इस बात से इंकार किया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सी.जे.पी.) के नेतृत्व वाले मार्च के दौरान अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया था। पुलिस का कहना है कि उसके अधिकारियों ने बल का प्रयोग केवल तभी किया, जब प्रदर्शनकारियों ने ‘हिंसा का सहारा लेना शुरू कर दिया’।
मेष राशि वालों आज का दिन आपके लिए ठीक रहेगा। आज मेहनत का बेहतरीन परिणाम मिल सकता है। नए लोगों से
वृष राशि वालों आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। व्यापार में पुराने मित्र से
मिथुन राशि वालों आज का दिन आपके लिए फेवरेबल रहेगा। आज युवाओं को नई उपलब्धियां मिल सकती हैं। दफ्तर में
कर्क राशि वालों आज का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहेगा। ऑफिस में आपके विचारों को महत्व मिल सकता है।
सिंह राशि वालों आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। जीवनसाथी के
कन्या राशि वालों आज का दिन आपके लिए फेवरेबल रहेगा। प्रॉपर्टी के काम से क्षेत्र से जुड़े लोगों को कोई नया प्रोजेक्ट मिल
तुला राशि वालों आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहेगा। करियर में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। किसी नए काम
वृश्चिक राशि वालों आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। आर्थिक रूप से राहत बनी रहेगी। आज अचानक से किसी
धनु राशि वालों आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहेगा। व्यापार के कामकाज में तेजी बनी रहेगी। आय के नए स्रोत
मकर राशि वालों आज का दिन आपके लिए शानदार रहेगा। व्यापार में वृद्धि होने के संकेत हैं। जीवनसाथी के सहयोग से रुके हुए
कुंभ राशि वालों आज का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहेगा। पहले से निवेश किया गया धन वापस मिल सकता है। नौकरीपेशा
मीन राशि वालों आज का दिन आपके लिए बेहतर रहेगा। दोस्तों के साथ किसी स्थान पर घूमने जा सकते हैं। बिज़नेस में
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29/10/2026 06:30 IST
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