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जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में देश को लेकर कई सपने थे। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे-भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा?...
हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि उनकी सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार और चौथे के जन्म पर 40 हजार रुपए देगी। इस...
अमरीका सरकार, तेल व्यापारी और निजी विश्लेषक इस बात पर बंटे हुए हैं कि तेहरान के पास कच्चा तेल छिपाने के लिए जगह खत्म होने से पहले कितना समय बचा है।
पिछले कुछ समय से मौसम वैज्ञानिकों के हवाले से यह खबर आ रही है कि इस साल भीषण गर्मी पडऩे वाली है। इस खबर से सबसे ज़्यादा चिंता कृषि वैज्ञानिकों और...
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मुझे तो यू.जी.सी. के नए नियमों के पीछे गहरी देशी-विदेशी साजिश की बू आ रही है और एक भूल या जानबूझ कर की गई गलती का राजनीतिक फायदे के लिए शोषण किया जा रहा है।
भारतीय संस्कृति में, जब हम भक्ति आंदोलन की बात करते हैं, तो सबसे पहले जिस आध्यात्मिक विचारक का नाम हमारे मन में आता है, वह है श्री गुरु रविदास जी का। ऐसा कहा जाता है कि जब भी संसार में अत्याचार, बुराई या दुराचार चरम पर पहुंचता है, तब स्वयं भगवान किसी न किसी रूप में मानव रूप धारण करके इस अंधकार में मानवता का मार्ग दिखाने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। 15वीं-16वीं शताब्दी की बात करें, जब समाज जातिवाद, गरीबों पर अत्याचार, भेदभाव और ऊंच-नीच जैसी बुराइयों से ग्रस्त था, तब मानवता को इन बुराइयों से मुक्त कर
अजित पवार के अचानक निधन से महाराष्ट्र में एक राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भविष्य पूरी तरह से अनिश्चित हो गया है। इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि उनका जनसमर्थन और संगठनात्मक नियंत्रण किसे मिलेगा। ऐसे में राकांपा बिखराव, पुनर्गठन और सुलह के चौराहे पर खड़ी है। अजित पवार के बाद पार्टी में कोई दूसरा बड़ा नेता नहीं है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय हैं। हालांकि, उनके पास प्रशासनिक अनुभव की कमी है। इस बीच, पार्टी
भारत का मूलमंत्र, लोकतंत्र और समानता का आधार होते हुए भी व्यवस्था की कार्यप्रणाली सोचने को मजबूर करती है कि यही सत्य है या कोई भ्रम है। उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, जिसके पास भारत में उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी है, इस तरह के नियम बनाए, जिन पर उच्चतम न्यायालय गौर न करे तो देश में युवाओं की स्थिति यह हो जाए कि आपस में बात करने या मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने में इसलिए हिचकिचाएं कि कहीं सरकारी नियमों की अवहेलना तो नहीं कर रहे। यह डर पैदा करता है और खतरनाक है।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वीरवार यू.जी.सी. विनियम 2026 पर स्टे लगाने के बाद देश के हर सामान्य नागरिक विशेषकर छात्रों और शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। उसकी जगह कोर्ट ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए फिलहाल पूर्ववर्ती 2012 के नियम को लागू कर दिया है।
अजित पवार की विमान हादसे में दर्दनाक मौत से उनका पूरा परिवार गहरे सदमे में है। उनकी एन.सी.पी. पार्टी के नेता, विधायक, कार्यकत्र्ता तिराहे पर हैं। दादा के जाने से देवेन्द्र (फडऩवीस) पशोपेश में हैं। एकनाथ शिंदे सही वक्त के इंतजार में हैं। महाराष्ट्र की राजनीति कोई नई करवट लेने को बेचैन दिखाई दे रही है। ममता बनर्जी भले ही साजिश देख रही हों लेकिन महाराष्ट्र के नेता सियासत में चरमराहट सुन रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस और एकनाथ शिंदे की आपसी सियासी लड़ाई में दादा पवार ढाल बनते रहे हैं। अब देवे
प्रतिष्ठा और सम्मान बनाम दरबारी राजनीति? 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए भव्य रूप से पद्म पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। पद्म पुरस्कार प्रदान करने पर कुछ लोग उसकी प्रशंसा करते हैं, कुछ उदासीनता दिखाते हैं और विपक्ष आलोचना करता है, जिससे एक राजनीतिक विवाद पैदा होता है और विपक्षी दल मोदी सरकार पर आरोप लगाते हैं कि उसने राष्ट्रीय सम्मानों को राजनीतिक संदेश और संकेत देने का हथियार बना दिया है।
22 सितम्बर, 2025 से जी.एस.टी. दरों में सुधार से आम आदमी को महंगाई से राहत व कारोबारियों के लिए टैक्स सिस्टम और अधिक सरल हुआ है। उद्योगों को इनपुट टैक्स क्रैडिट (आई.टी.सी.) के डिजिटल रिफंड तेज हुए। केंद्र के इन सुधारों को उन राज्यों का समर्थन मिला, जहां मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर मजबूत है।
हर कुछ दशकों में, जब वैश्विक अस्थिरता बढ़ती है, तब एक परिचित शब्द सुनाई देने लगता है-विश्व व्यवस्था (वल्र्ड ऑर्डर)। हालिया दिनों में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कुछ तल्ख बयानों और हैरानी भरे कदमों के बाद यह शब्दावली फिर चर्चा में है। अब इसे ‘नई विश्व व्यवस्था’ के रूप में पेश किया जा रहा है।
भारत -यूरोपीय संघ (ई.यू.) संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ तब आया, जब नई दिल्ली में हुई भारत-ई.यू. सम्मिट के दौरान दोनों पक्षों के बीच एक अहम फ्री ट्रेड एग्रीमैंट (एफ.टी.ए.) पर बातचीत पूरी होने की औपचारिक घोषणा की गई, जिसमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह पूरा घटनाक्रम इस बात को साफ तौर पर दिखाता है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और दुनिया के सबसे बड़े एकल बाजार यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक सांझेदारी
यह कोई रहस्य नहीं है कि देश में टैलीविजन देखने वालों की संख्या, खासकर न्यूज कैटेगरी की, तेजी से घट रही है। एक अनुमान के अनुसार, डायरैक्ट-टू-होम ऑप्रेटरों का सब्सक्राइबर बेस 2019 में 7.2 करोड़ से घटकर 2024 में 6.10 करोड़ हो गया है और इस साल के आखिर तक इसके 5.1 करोड़ तक गिरने की उम्मीद है।
23 जनवरी, 2026 की बर्फबारी ने मनाली को पंगु नहीं बनाया, हिमाचल प्रदेश सरकार ने बनाया। हिमालयी शहर में बर्फबारी कोई असाधारण घटना नहीं, यह मौसमी है, जिसका अनुमान लगाया जा सकता है और जिसकी बार-बार भविष्यवाणी की जाती है। जिस बात ने जनता को चौंका दिया, वह बर्फ की तीव्रता नहीं थी, बल्कि वह गति थी, जिससे शासन व्यवस्था चरमरा गई। इसके बाद जो संकट आया, वह प्रकृति का काम नहीं था, बल्कि दूरदॢशता, समन्वय और जिम्मेदारी की विफलता थी।
पद्म पुरस्कारों पर अब सामान्य तौर पर ज्यादा हो-हल्ला नहीं मचता। यह भी कहने वाले कम हो गए कि मैं पद्म पुरस्कार (पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री) दिलवा सकता हूं। ज्यादा नहीं तो बीते दशक के पहले ये बातें अक्सर सुनने को मिल जाती थीं और सामने दिखने वाली या बड़ी हस्तियों के आस-पास रहने वाले लोग इससे पुरस्कृत हो जाते थे। राष्ट्रीय स्तर के इन पुरस्कारों को पाने की जो होड़ पहले होती थी, अब भी होती है लेकिन अब शायद ज्यादा साफ प्रक्रिया होने से सचमुच समाज बदलने वाले या फिर जिन्होंने कला, संस्कृति, विज्
हाल ही में, संसद में विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वी.बी. जी राम जी) पर बोलते हुए मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘यह गरीबों का सफाया नहीं, बल्कि परजीवियों का सफाया है’ और मेरा यह बयान न तो कोई अतिशयोक्ति था और न ही राजनीतिक उकसावा।
भारत के पहले राष्ट्रपति, डा. राजेंद्र प्रसाद ने 16 मई, 1952 को पहली लोकसभा को संबोधित करते हुए संसद के सदस्यों को उनकी लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों की गंभीरता की याद दिलाई। उन्होंने यह साफ किया कि संविधान लागू होने, राष्ट्रपति के चुनाव और पहले आम चुनावों के साथ, आजाद भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का पहला
यह बहुत दुखद दृश्य होता है जब आप छोटे बच्चों पर इतना ज्यादा दबाव देखते हैं। नर्सरी फॉर्म से लेकर कॉलेज कट-ऑफ तक-चिंता का लंबा सफर। यह अब पहले से कहीं ज्यादा जल्दी शुरू हो जाता है। यह एक डरावनी कहानी है जब आप युवा माता-पिता को टैंशन में देखते हैं, बोर्ड एग्जाम या करियर चुनने के लिए नहीं, बल्कि नर्सरी
मेष राशि वालों व्यापार से जुड़ी कोई चिंता आपको सता सकती है। अजनबी लोगों पर भरोसा न करें। नौकरीपेशा
वृष राशि वालों बिजनेस में मनचाहे नतीजे मिलने की उम्मीद है। समय से किए गए कामों के परिणाम
मिथुन राशि वालों आज पैसों का निवेश करना आप पर भारी पड़ सकता है। हो सके तो
कर्क राशि वालों युवाओं को नौकरी में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ऑनलाइन
सिंह राशि वालों पार्टनरशिप संबंधी कार्यों में उलझने पैदा हो सकती हैं। आर्थिक नुकसान होने के योग हैं।
कन्या राशि वाले नौकरीपेशा लोग अपने काम को लेकर सावधान रहें। कोई आपका बना बनाया काम बिगाड़ सकता है।
तुला राशि वालों के कार्यक्षेत्र से जुड़े आइडियाज बॉस को प्रसन्न आएंगे। गृहस्थ जीवन में सुख की
वृश्चिक राशि वालों व्यवसाय में मेहनत के उचित परिणाम हासिल नहीं होंगे। सहकर्मियों की गतिविधियों पर
धनु राशि वालों जिस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत कर रहे थे, आज उसका उचित परिणाम मिलेगा।
मकर राशि वालों बिजनेस बढ़ाने के लिए सफल व्यक्तियों का मार्गदर्शन अवश्य लें। बॉस से विशेष
कुंभ राशि वालों आज का दिन कार्यक्षेत्र में परिवर्तन लाने वाला रहेगा। दूसरों के भरोसे न रहें। आपका
मीन राशि वालों आपकी किसी खास व्यक्ति के साथ बातचीत हो सकती है। किसी गलती के कारण आपकी
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26/05/2026 21:30 IST
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