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हमारे देश भर में फैले जंगलों, पहाडिय़ों और दूरदराज की बस्तियों में एक शांत लेकिन सफल परिवर्तन चल रहा है। जनजातीय समुदाय लंबे समय से भारत की विकास गाथा...
वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों के समय हर कोई नेता और राजनीतिक दल देश के मतदाताओं को दिन में तारे दिखाने के बड़े-बड़े वादे करते हैं। वे उनके...
‘पहले से ही ऐसे परजीवी हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और आप भी उनमें शामिल होना चाहते हैं। कॉक्रोच जैसे कुछ युवा हैं जिन्हें कोई रोजगार नहीं...
जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में देश को लेकर कई सपने थे। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे-भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा?...
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इस सप्ताह के अंत तक, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य अतिथि थीं, संभवत: उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगी, जिसे उन्होंने ‘ऐतिहासिक’ बताया है-भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता। ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहे जाने वाले इस मुक्त व्यापार समझौते का परिणाम 2 दशकों से रुकी हुई बातचीत के बाद सामने आया है। लेकिन क्या यह सफल होगा? या फिर (अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूरोप और भारत दोनों पर टैरिफ का हथियार रखने के कारण) जल्दबाजी में किए गए इस समझौते की संतान
2027 के पंजाब असैंबली के लिए पंथक मामले एक केंद्रीय मुद्दा बन गए हैं। सभी राजनीतिक दल पंथक एजैंडे को आगे रखकर चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं। सभी पाॢटयां खुद को पंथक सपोर्टर और दूसरी पाॢटयों को पंथ विरोधी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। लेकिन इस पूरे परिदृश्य में, लगभग सभी पाॢटयों की हालत ‘हमाम में सब नंगे’ जैसी हो गई है क्योंकि इस समय सभी मुख्य पाॢटयों पर पंथक हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लग रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट भारत के सभी समूहों की आकांक्षाओं, आंतरिक और बाह्य चुनौतियों व आवश्यकताओं, राजनीतिक मांग एवं नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा देश के घोषित आॢथक विकास लक्ष्यों की कसौटी पर खरा है या नहीं? पिछले कुछ समय से उत्पन्न वैश्विक उथल-पुथल में भारत को अपनी विकास गति बनाए रखने के साथ नई वैश्विक सांझेदारी, निर्यात बाजार आदि विकसित करने तथा घरेलू उत्पादकों को नीतियों और प्रोत्साहन से समर्थन देने की चुनौती है।
टैलीविजन स्क्रीन पर यह दिखाई दे रहा था कि बारामती में अजित पवार के अंतिम संस्कार के लिए हजारों नहीं, बल्कि दसियों हजार, यदि लाख नहीं, शोक संतप्त लोग एकत्र हुए थे। पवार परिवार (शरद पवार के परिवार वाले) बारामती में सबकी आंखों के तारे हैं। केवल यही बात उस भीड़ का कारण हो सकती थी, जो उस व्यक्ति को अपनी अंतिम विदाई देने के लिए जुटी थी, जो राज्य का मुख्यमंत्री बनने के लिए बेताब था, लेकिन बन न सका! मुझे जूलियस सीजर के अंतिम संस्कार पर मार्क एंटनी के उस भाषण की याद आती है, जिसे शेक्सपियर ने अपने नाटक मे
जब मैं 2013 में अमरीका में इसराईल का राजदूत बना, तो मेरी पत्नी और मैं 5 बच्चों के साथ वाशिंगटन डी.सी. पहुंचे, जिनकी आयु 10 वर्ष से कम थी, जिनमें एक 2 वर्ष का लड़का और 4 महीने की एक बच्ची भी शामिल थी। हम एक ऑ पेयर (देखभाल सहायक) नियुक्त करने की आशा कर रहे थे, ताकि मेरी पत्नी राजदूत की पत्नी होने से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा सकें, जिनमें हमारे आधिकारिक निवास पर कार्यक्रमों की मेजबानी करना, वाशिंगटन डी.सी. में विभिन्न समारोहों में भाग लेना तथा राजधानी से बाहर की यात्राओं में मेरे साथ जाना शामिल था।
इस वर्ष ‘परीक्षा पे चर्चा’ का आयोजन भारत की शिक्षा यात्रा में एक शांत लेकिन निर्णायक बदलाव को रेखांकित करता है। माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शुरू हुई यह पहल, जो 2018 में एक एकल वाॢषक संवाद के रूप में शुरू हुई थी, अब एक विश्वव्यापी सामूहिक प्रयास बन गई है, जिसमें विद्यार्थियों के संपूर्ण कल्याण को केंद्र में रखा गया है और माता-पिता व शिक्षक इस सांझी जिम्मेदारी के सक्रिय भागीदार हैं।
हर सभ्यता अपनी कुछ छवियां बनाती और कहानियां गढ़ती है। इसमें वह स्वयं को और दूसरों को बताती है कि उसका मूल उद्देश्य क्या है और वह किन मूल्यों को प्राथमिकता देती है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद पश्चिमी संस्कृति के द्योतक देशों ने स्वयं को मानवाधिकारों का संरक्षक, कानूनी शासन का आदर्श, लैंगिक समानता का अग्रदूत, आधुनिक नैतिकता का मानक और स्वतंत्रता-अधिकारों का पैरोकार घोषित किया। यह स्वघोषणा केवल शब्दों तक सीमित नहीं रही, इसे पूरी दुनिया पर थोपने की भी कोशिश की गई। आॢथक दबाव, राजनीतिक हस्तक्षेप, सांस्क
26 जनवरी को, जब देश राष्ट्रीय राजधानी में सांस्कृतिक विविधता और देश की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करके गणतंत्र दिवस मना रहा था, उत्तराखंड के एक छोटे से शहर कोटद्वार में एक शर्मनाक घटना हो रही थी, जो बढ़ती सांप्रदायिकता और समाज में बढ़ते जहर को दिखा रही थी।
कैंसर शरीर की किसी कोशिका या कोशिकाओं के समूह की असामान्य वृद्धि है। इसे नष्ट न करने या न हटाने पर कैंसर बड़ी तेजी से फैल कर मौत का कारण बन सकता है। मानव शरीर में मौजूद अरबों कोशिकाएं आम तौर पर एक नियंत्रित पैटर्न में बढ़ती हैं जिनमें कभी-कभी होने वाले बदलाव उन्हें कैंसर वाली कोशिकाओं में बदल देते हैं।
इन पंक्तियों का लेखक पिछले कुछ समय से बार-बार यह आगाह करता रहा है कि चाहे मोदी सरकार कुछ भी कहे, ट्रम्प इसमें कामयाब होंगे कि वह भारत सरकार को ट्रेड डील पर मजबूर करें। प्रचार जो भी हो, इस डील में कृषि को शामिल किया जाएगा। पिछले कई महीनों से दरबारी मीडिया खबर फैला रहा था कि मोदी ने अमरीका के सामने झुकने से इंकार कर दिया। अगस्त में प्रधानमंत्री ने कहा था कि किसान, पशुपालक और मछुआरे उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, उनके हितों से कोई समझौता नहीं होगा। यूरोपीय यूनियन से हुए व्यापार समझौते में कृषि को बा
वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जा चुका है और सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7$5 प्रतिशत रहने के लिए स्वयं को शाबाशी दी है किंतु एक प्रश्र अभी भी अनुत्तरित रह गया है कि क्या हम विश्व में आपदाग्रस्त देश बन गए हैं? ऐसा लगता है कि हम एक के बाद एक आपदा का सामना कर रहे हैं और इन आपदाआें में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है परंतु समय पर निवारात्मक कदम उठाने के लिए हमारे अधिकारियों के कानों पर कभी भी जूं नहीं रेंगती है।
2023 में अमरीका के कोलेरेडो विश्वविद्यालय में एक दम्पति, आदित्य प्रकाश और उर्मि भट्टाचार्य पीएच.डी. कर रहे थे। वे वहां अपना लंच ओवन में गर्म कर रहे थे। खाने में पालक-पनीर था। लेकिन विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने उन्हें खाना गर्म करने से रोक दिया। उनका कहना था कि इसमें से बदबू आ रही है, इसलिए इसे यहां गर्म नहीं किया जा सकता। यह भी कि हम तो यहां ब्रोकली भी गर्म नहीं करने देते।
ट्रम्प की ‘बाडी-लैंग्वेज’ से तो नहीं लगता कि उन्हें युद्ध के भयानक परिणामों का ज्ञान हो। यह तो ठीक है कि अमरीका की ‘राजनीतिक- दादागिरी’ सब देशों पर भारी है लेकिन विश्व के राजनेता उन देशों की लिस्ट तो निकाल कर पढ़ें जिन्हें अमरीका की दादागिरी ने तबाह कर दिया।
जैसे -जैसे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मुख्य राजनीतिक दलों में 2 गठबंधन प्रमुख हैं-कांग्रेस और वाम दलों के साथ सत्तारूढ़ द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन और अन्नाद्रमुक गठबंधन। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्रमुक का नेतृत्व करना और इस गठबंधन को बनाए रखना जारी रखे हुए हैं।
केंद्रीय बजट 2026-27 ऐसे समय में आया है जब भारत की व्यापक आॢथक तस्वीर संतुलित दिखाई देती है। विकास दर स्थिर है, महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट आई है, राजकोषीय अनुशासन कायम है लेकिन वैश्विक परिदृश्य में संरक्षणवाद और प्रमुख निर्यात बाजारों में बढ़ती टैरिफ बाधाएं नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। ऐसे माहौल में यह बजट किसी नाटकीय बदलाव का प्रयास नहीं करता, बल्कि एक परिचित और सुनियोजित रणनीति को आगे बढ़ाता है-सार्वजनिक पूंजी व्यय को बढ़ाना, घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना, लघु उद्यमों को संरक्षण देना
भारत -यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के रूप में जाना जा रहा है, लगभग 2 दशकों की लंबी वार्ताओं का परिणाम है और इसमें 2 अरब से अधिक की आबादी तथा 27 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त अर्थव्यवस्था शामिल है, जो वैश्विक जी.डी.पी. का लगभग 25 प्रतिशत है। यह समझौता भारत की आॢथक महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर प्रदान करता है, विशेषकर ऐसे समय में, जब अमरीकी टैरिफ के कारण निर्यात प्रभावित हो रहा है। हालांकि, इसे प्रभावी बनाने के लिए सरकार को रणनीतिक कदम उठाने होंगे।
मेष राशि वालों व्यापार से जुड़ी कोई चिंता आपको सता सकती है। अजनबी लोगों पर भरोसा न करें। नौकरीपेशा
वृष राशि वालों बिजनेस में मनचाहे नतीजे मिलने की उम्मीद है। समय से किए गए कामों के परिणाम
मिथुन राशि वालों आज पैसों का निवेश करना आप पर भारी पड़ सकता है। हो सके तो
कर्क राशि वालों युवाओं को नौकरी में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ऑनलाइन
सिंह राशि वालों पार्टनरशिप संबंधी कार्यों में उलझने पैदा हो सकती हैं। आर्थिक नुकसान होने के योग हैं।
कन्या राशि वाले नौकरीपेशा लोग अपने काम को लेकर सावधान रहें। कोई आपका बना बनाया काम बिगाड़ सकता है।
तुला राशि वालों के कार्यक्षेत्र से जुड़े आइडियाज बॉस को प्रसन्न आएंगे। गृहस्थ जीवन में सुख की
वृश्चिक राशि वालों व्यवसाय में मेहनत के उचित परिणाम हासिल नहीं होंगे। सहकर्मियों की गतिविधियों पर
धनु राशि वालों जिस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत कर रहे थे, आज उसका उचित परिणाम मिलेगा।
मकर राशि वालों बिजनेस बढ़ाने के लिए सफल व्यक्तियों का मार्गदर्शन अवश्य लें। बॉस से विशेष
कुंभ राशि वालों आज का दिन कार्यक्षेत्र में परिवर्तन लाने वाला रहेगा। दूसरों के भरोसे न रहें। आपका
मीन राशि वालों आपकी किसी खास व्यक्ति के साथ बातचीत हो सकती है। किसी गलती के कारण आपकी
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27/05/2026 03:30 IST
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