Edited By jyoti choudhary,Updated: 16 Jan, 2026 05:59 PM

दुनिया भर के मेटल्स बाजार में अचानक हलचल मच गई है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कॉपर, एल्युमिनियम, जिंक और टिन जैसी धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन का हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) पर लिया गया सख्त एक्शन है,...
बिजनेस डेस्कः दुनिया भर के मेटल्स बाजार में अचानक हलचल मच गई है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कॉपर, एल्युमिनियम, जिंक और टिन जैसी धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन का हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) पर लिया गया सख्त एक्शन है, जिसने बाजार की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया और निवेशकों को मुनाफावसूली के लिए मजबूर कर दिया। शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) से लेकर लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) तक कीमतों में दबाव नजर आया।
चीन ने क्या कदम उठाया?
चीन के रेगुलेटर्स ने SHFE समेत कई फ्यूचर्स एक्सचेंजों को निर्देश दिया है कि हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के सर्वर एक्सचेंज के डेटा सेंटर्स से हटाए जाएं। हाई-स्पीड ट्रेडिंग करने वाले सर्वर को इस महीने के अंत तक हटाने का आदेश दिया गया है, जबकि अन्य ट्रेडिंग उपकरणों को 30 अप्रैल तक हटाना होगा।
HFT कंपनियां अपने सर्वर एक्सचेंज के बेहद पास लगाती हैं, जिससे वे मिलीसेकेंड में ट्रेड कर पाती हैं। रेगुलेटर्स का मानना है कि इससे बाजार में असामान्य उतार-चढ़ाव बढ़ता है।
कीमतों पर तुरंत असर
चीन के इस फैसले के बाद मेटल्स की कीमतों में तेज गिरावट आई—
- LME पर कॉपर 1% गिरकर 12,978 डॉलर प्रति टन
- निकेल 3% टूटा
- टिन 2% फिसला
- SHFE पर टिन में 8% तक की भारी गिरावट
- शंघाई में कॉपर कॉन्ट्रैक्ट 1.2% गिरकर 101,330 युआन पर बंद हुआ
क्यों चिंता बन रही थी HFT?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग से कीमतों में अचानक तेज उतार-चढ़ाव आता है और बाजार की नैचुरल चाल बिगड़ती है। Soochow Jiuying Investment के ट्रेडिंग हेड जिया झेंग के अनुसार, यह कदम वोलैटिलिटी कम करेगा, लेकिन लंबी अवधि की कीमतों की दिशा नहीं बदलेगा।
इससे पहले क्यों था बाजार इतना गरम?
पिछले कुछ हफ्तों में चीन में ट्रेडिंग वॉल्यूम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
- कॉपर और टिन ने LME पर ऑल-टाइम हाई बनाया
- टिन साल की शुरुआत से अब तक 35% चढ़ चुका था
- LMEX इंडेक्स भी रिकॉर्ड के करीब पहुंच गया था