EPFO के करोड़ों मेंबर्स को लग सकता है बड़ा झटका! हो सकता है ये ऐलान

Edited By Updated: 27 Feb, 2025 10:54 AM

crores of epfo  members may get a big shock interest rate cut

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को झटका लग सकता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (CBT) शुक्रवार, 28 फरवरी को बैठक करेगा। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में भविष्य निधि जमा पर ब्याज...

बिजनेस डेस्कः प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को झटका लग सकता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (CBT) शुक्रवार, 28 फरवरी को बैठक करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बैठक में भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर घटाने का फैसला हो सकता है। चालू वित्त वर्ष में EPFO के करीब 30 करोड़ सब्सक्राइबर हैं।

इसकी वजह यह है कि स्टॉक मार्केट और बॉन्ड यील्ड से ईपीएफओ की कमाई में गिरावट आई है। साथ ही ज्यादा दावों का सेटलमेंट किया गया है। पिछली बार इसे बढ़ाकर 8.25% किया गया था। उससे पहले 2022-23 में पीएफ सब्सक्राइबर्स को 8.15% ब्याज दिया गया था।

ईपीएफओ के बोर्ड की इनवेस्टमेंट कमेटी की पिछले हफ्ते बैठक हुई थी। इसमें ईपीएफओ के इनकम और एक्सपेंडीचर प्रोफाइल पर चर्चा हुई ताकि बोर्ड को ईपीएफ इंटरेस्ट रेट की सिफारिश की जा सके। बोर्ड में शामिल कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इस साल इंटरेस्ट रेट पिछले साल के मुकाबले कम हो सकता है। इसकी वजह यह है कि हाल के महीनों में बॉन्ड यील्ट में गिरावट आई है। ऐसे में अगर ज्यादा ब्याज दिया जाता है तो फिर ईपीएफओ के पास कोई सरप्लस नहीं रह जाएगा।

कब मिला सबसे ज्यादा ब्याज

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों की बेसिक सैलरी पर 12% की कटौती ईपीएफ खाते के लिए की जाती है। साथ ही कंपनी भी इतना ही पैसा कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करती है। ईपीएफओ के करीब सात करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक EPFO ने 2024-25 में 5.08 करोड़ से ज्यादा क्लेम निपटाए हैं। इन क्लेम की कुल राशि ₹2.05 लाख करोड़ है। 2023-24 में 4.45 मिलियन क्लेम निपटाए गए थे, जिनकी कुल वैल्यू ₹1.82 लाख करोड़ थी। मतलब इस साल लोगों ने अपने PF अकाउंट से पैसा ज्यादा पैसा निकाला है। साथ ही स्टॉक मार्केट और बॉन्ड से ईपीएफओ को कम कमाई हुई है।

1952-53 में ईपीएफओ की ब्याज दर 3% थी। धीरे-धीरे बढ़ते हुए 1989-90 में यह 12% तक पहुंच गई। यह अब तक की सबसे ज्यादा ब्याज दर थी। साल 2000-01 तक यही ब्याज दर रही। उसके बाद 2001-02 में यह घटकर 9.5% हो गई। साल 2005-06 में यह और गिरकर 8.5% पर आ गई। फिर 2010-11 में ब्याज दर को बढ़ाकर 9.50% किया गया। लेकिन 2011-12 में इसे फिर से घटाकर 8.25% कर दिया गया। 2021-22 में यह सबसे कम 8.10% तक पहुंच गई थी।

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