Edited By jyoti choudhary,Updated: 04 Apr, 2026 04:48 PM

इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने घरेलू बाजार को लेकर बड़ा कदम उठाया है। व्यापार घाटा कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से सरकार ने सोना, प्लैटिनम और संबंधित उत्पादों के आयात नियम सख्त कर दिए हैं।
बिजनेस डेस्कः इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने घरेलू बाजार को लेकर बड़ा कदम उठाया है। व्यापार घाटा कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से सरकार ने सोना, प्लैटिनम और संबंधित उत्पादों के आयात नियम सख्त कर दिए हैं।
अब इन वस्तुओं को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाल दिया गया है। इसका मतलब है कि अब विदेश से इनका आयात करने के लिए सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। अब तक, सोने-चांदी के कई आभूषण या इंडस्ट्रियल उत्पाद बिना किसी बाधा के आसानी से हमारे देश में आयात किए जा सकते थे।
किन-किन चीजों पर असर
इस फैसले के दायरे में सोने के आभूषण, प्लैटिनम उत्पाद, कीमती धातुओं से बने सामान, इंडस्ट्रियल और लैब उपयोग की वस्तुएं और गोल्ड प्लेटेड आइटम शामिल हैं।
पुराने सौदों पर भी लागू
सरकार ने साफ किया है कि यह नियम नए और पुराने दोनों तरह के सौदों पर तुरंत प्रभाव से लागू होगा। जिन व्यापारियों ने पहले ही ऑर्डर या एलसी जारी कर दिए हैं, उन्हें भी कोई छूट नहीं मिलेगी।
कीमतों में उछाल की आशंका
आयात पर रोक से घरेलू बाजार में सप्लाई घट सकती है। मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने से आने वाले समय में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
ज्वेलरी इंडस्ट्री पर असर
अब ज्वेलर्स और निर्माताओं को कच्चा माल खरीदने के लिए सरकारी परमिट लेना होगा, जिससे प्रक्रिया जटिल हो सकती है। इसका असर उत्पादन लागत और ज्वेलरी की कीमतों पर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए मौका
जहां नए खरीदारों के लिए यह झटका है, वहीं पहले से निवेश कर चुके लोगों को फायदा हो सकता है। सप्लाई घटने से उनके सोने का मूल्य बढ़ने की संभावना है।
सरकार का मकसद
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य रुपए को मजबूत रखना, विदेशी मुद्रा बचाना और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना है।