Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Apr, 2026 06:05 PM

पिछले कुछ महीनों में सिल्वर ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। महज दो महीनों में करीब 15% तक नुकसान दर्ज किया गया है, जिससे कई निवेशक अब अपनी रणनीति पर दोबारा विचार कर रहे हैं। 1 अप्रैल से लागू हुए नए...
बिजनेस डेस्कः पिछले कुछ महीनों में सिल्वर ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। महज दो महीनों में करीब 15% तक नुकसान दर्ज किया गया है, जिससे कई निवेशक अब अपनी रणनीति पर दोबारा विचार कर रहे हैं। 1 अप्रैल से लागू हुए नए वैल्यूएशन नियमों ने भी निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया है।
गिरावट के पीछे क्या हैं बड़े कारण?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार सिल्वर की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। चीन में सिल्वर ट्रेडिंग पर सख्ती के बाद बड़े स्तर पर बिकवाली हुई। ग्लोबल सिल्वर ETF से पैसा निकलना, मजबूत अमेरिकी डॉलर और कमजोर इंडस्ट्रियल डिमांड ने भी कीमतों पर दबाव बनाया। हाल ही में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार को प्रभावित किया है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना जरूरी। लंबी अवधि के लिए इक्विटी सबसे बेहतर विकल्प है और धीरे-धीरे सिल्वर में निवेश कम करना चाहिए।
गोल्ड बन रहा सुरक्षित विकल्प
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा समय में सोना सिल्वर के मुकाबले ज्यादा स्थिर निवेश माना जा रहा है। पोर्टफोलियो में 5–10% गोल्ड रखना फायदेमंद हो सकता है, जबकि सिल्वर में फिलहाल निवेश से बचने की सलाह दी जा रही है।
नए नियम का क्या असर होगा?
1 अप्रैल से लागू नए नियम के तहत, अब गोल्ड और सिल्वर ETF की वैल्यूएशन घरेलू स्पॉट प्राइस पर होगी। पहले यह लंदन बेंचमार्क पर आधारित थी। इस बदलाव से निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता और भारत-केंद्रित रिटर्न का फायदा मिलेगा।