YES Bank–Suraksha ARC डील पर EOW की नजर, क्लोज्ड-लूप फंडिंग के आरोप

Edited By Updated: 17 Feb, 2026 01:06 PM

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मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) अब यस बैंक और सुरक्ष़ा एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (ARC) से जुड़े कथित “क्लोज्ड-लूप फंडिंग” और संदिग्ध लोन असाइनमेंट मामलों की जांच की तैयारी में है। यह शिकायत एचडीआईएल (Housing Development and...

मुंबईः मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) अब यस बैंक और सुरक्ष़ा एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (ARC) से जुड़े कथित “क्लोज्ड-लूप फंडिंग” और संदिग्ध लोन असाइनमेंट मामलों की जांच की तैयारी में है। यह शिकायत एचडीआईएल (Housing Development and Infrastructure Limited) के पूर्व प्रमोटर और निलंबित निदेशक राकेश वाधवान की ओर से दर्ज कराई गई है।

शिकायत में वित्त वर्ष 2017 से 2019 के बीच दिए गए कर्ज, उनके पुनर्गठन और बाद में ARC को ट्रांसफर किए जाने की प्रक्रिया पर आपराधिक जांच की मांग की गई है। आरोप है कि इन लेनदेन में पारदर्शी मूल्य निर्धारण (प्राइस डिस्कवरी), स्वतंत्र वैल्यूएशन और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

क्या है आरोप?

शिकायत के मुताबिक, सुरक्ष़ा ARC द्वारा जमा की जाने वाली 15% मार्जिन मनी कथित तौर पर उन्हीं समूह संस्थाओं से आई, जिन्हें यस बैंक ने फंडिंग दी थी। इससे कथित तौर पर “क्लोज्ड-लूप फंडिंग” या “राउंड-ट्रिपिंग” की स्थिति बनी, जिसमें वास्तविक थर्ड-पार्टी पूंजी शामिल नहीं थी।

राकेश वाधवान ने यह भी दावा किया है कि यस बैंक की एक विशेष ऑडिट रिपोर्ट में स्ट्रेस्ड एसेट की बिक्री के दौरान नीलामी, प्रतिस्पर्धी बोली और वैल्यूएशन रिपोर्ट की कमी की ओर इशारा किया गया था। आरोप है कि SMA-2 श्रेणी के लोन भी बिना रिकवरी प्रयासों के ARC को ट्रांसफर कर दिए गए, जिससे बैलेंस शीट में हेरफेर और “एवरग्रीनिंग” की आशंका जताई गई है।

150 करोड़ रुपए के लोन का मामला

एक प्रमुख उदाहरण के तौर पर Sapphire Land Development Pvt Ltd (SLDPL) को दिए गए 150 करोड़ रुपए के टर्म लोन का जिक्र किया गया है। आरोप है कि जहां क्रेडिट मेमो में 100 करोड़ रुपए की मंजूरी दर्शाई गई थी, वहीं 150 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए। बाद में इस लोन को 154.53 करोड़ रुपए की बकाया राशि के मुकाबले 150 करोड़ रुपए में सुरक्ष़ा ARC को असाइन कर दिया गया, जबकि लोन अभी मोरेटोरियम में था और NPA घोषित नहीं हुआ था।

शिकायत में कहा गया है कि यस बैंक ने इस डील में 127.50 करोड़ रुपये के सिक्योरिटी रिसीट्स अपने पास रखे, जिससे “ट्रू सेल” पर सवाल खड़े होते हैं। साथ ही SARFAESI नियमों और RBI के NBFC व सिक्योरिटाइजेशन दिशानिर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।

EOW की संभावित कार्रवाई

शिकायतकर्ता ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, रिकॉर्ड में हेरफेर और फंड डायवर्जन जैसे आरोपों में FIR दर्ज करने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, EOW प्रारंभिक जांच शुरू कर सकती है और आरोपों में दम पाए जाने पर FIR दर्ज की जा सकती है। इस मामले में यस बैंक और सुरक्ष़ा ARC की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या होता है ‘क्लोज्ड-लूप फंडिंग’?

“क्लोज्ड-लूप फंडिंग” ऐसी वित्तीय व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें किसी सौदे में इस्तेमाल की गई राशि उसी पक्ष या उससे जुड़े संस्थानों से आती है, जो उस सौदे में शामिल हैं यानी असल में कोई स्वतंत्र तीसरी पार्टी पूंजी नहीं लगती, बल्कि धन एक ही समूह के भीतर घूमता रहता है।

इस तरह की संरचना में पारदर्शिता, जोखिम के वास्तविक हस्तांतरण और बैलेंस शीट की सच्चाई पर सवाल उठते हैं, क्योंकि लेनदेन आर्म्स-लेंथ सिद्धांत के तहत नहीं होते।
 

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