Edited By jyoti choudhary,Updated: 24 Feb, 2026 01:13 PM

भारतीय आईटी सेक्टर इन दिनों दबाव में नजर आ रहा है और ताजा आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों का रुख पहले जैसा नहीं रहा। पिछले एक साल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने शीर्ष आईटी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है।
बिजनेस डेस्कः भारतीय आईटी सेक्टर इन दिनों दबाव में नजर आ रहा है और ताजा आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों का रुख पहले जैसा नहीं रहा। पिछले एक साल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने शीर्ष आईटी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, कई बड़ी आईटी कंपनियों में एफआईआई की हिस्सेदारी कम हुई है। बाजार जानकारों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से उभरने के बाद पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं की ग्रोथ पर दबाव आया है, जिसके चलते निवेशक सतर्क हो गए हैं और कंपनियों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।
जुलाई 2025 से जारी है बिकवाली
आईटी सेक्टर में बिकवाली की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक जुलाई 2025 से लगातार आईटी शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं। केवल फरवरी के पहले पखवाड़े में ही उन्होंने आईटी कंपनियों से करीब 10,965 करोड़ रुपए निकाले। National Securities Depository Limited (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, यह हाल के समय की सबसे बड़ी बिकवाली में से एक है।
भारत से निकासी के दो बड़े कारण
वैश्विक ब्रोकरेज Jefferies के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रेटेजी प्रमुख Christopher Wood ने कहा कि भारत से एफआईआई की बिकवाली के पीछे दो प्रमुख कारण रहे।
पहला, 2024 के अंत में चीन का शेयर बाजार बेहद आकर्षक वैल्यूएशन (करीब सात गुना अर्निंग्स) पर पहुंच गया था। इससे विदेशी निवेशकों ने भारत में मुनाफावसूली कर चीन में निवेश बढ़ाया।
दूसरा, कई वैश्विक निवेशकों ने ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में ओवरवेट पोजीशन ले रखी थी। पोर्टफोलियो संतुलन के लिए उन्हें अन्य बाजारों, खासकर भारत, से आंशिक निकासी करनी पड़ी।
AI रेस में चीन आगे
क्रिस्टोफर वुड के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में चीन मजबूत स्थिति में है, खासकर अपने ओपन-सोर्स मॉडल के कारण। उनका मानना है कि जब तक बड़ी टेक कंपनियां AI पर भारी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) करती रहेंगी, तब तक भारतीय बाजार तुलनात्मक रूप से कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस साल अमेरिकी बाजारों में यह बहस तेज हो सकती है कि बड़ी टेक कंपनियों द्वारा AI पर किया गया भारी निवेश वास्तव में लाभदायक साबित हो रहा है या नहीं।
कुल मिलाकर, वैश्विक पूंजी प्रवाह में बदलाव, चीन की आकर्षक वैल्यूएशन और AI से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भारतीय आईटी सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले समय में सेक्टर की रणनीतिक दिशा और वैश्विक निवेशकों का भरोसा इसकी चाल तय करेगा।