विदेशी निवेशकों का डगमगाया भरोसा, मार्च में FII की रिकॉर्ड बिकवाली

Edited By Updated: 07 Apr, 2026 05:48 PM

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भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की बिकवाली के लिहाज से मार्च 2026 बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। CDSL के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस दौरान ₹1.17 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की, जिससे बाजार की दिशा पूरी तरह बदल गई और...

बिजनेस डेस्कः भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की बिकवाली के लिहाज से मार्च 2026 बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। CDSL के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस दौरान ₹1.17 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की, जिससे बाजार की दिशा पूरी तरह बदल गई और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।

सबसे ज्यादा असर फाइनेंशियल सेक्टर पर देखने को मिला। बैंकिंग और NBFC शेयरों में भारी बिकवाली हुई, जहां अकेले इस सेक्टर से ₹60,655 करोड़ निकाले गए। इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा जोखिम इसी सेक्टर से कम किया। इसके चलते एसेट अंडर कस्टडी (AUC) घटकर ₹19.04 लाख करोड़ पर आ गया, जो 22 महीने का निचला स्तर है।

इस बिकवाली का सीधा असर बैंक निफ्टी पर पड़ा, जो मार्च में 17% से ज्यादा टूट गया। यह महामारी के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। सेक्टर का मार्केट कैप भी ₹9 लाख करोड़ से ज्यादा घट गया। खासतौर पर बड़े बैंकिंग शेयरों में कमजोरी ने पूरे सेक्टर को दबाव में ला दिया।

बॉन्ड यील्ड में उछाल 

बाजार पर दबाव की एक बड़ी वजह बॉन्ड यील्ड में उछाल भी रही। 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7% के पार पहुंच गई, जिससे बैंकों के निवेश पोर्टफोलियो पर मार्क-टू-मार्केट (MTM) नुकसान का खतरा बढ़ गया। अनुमान है कि बैंकिंग सिस्टम को ₹4,000–5,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है।

मार्च में रुपया 4.24% तक गिरा

वहीं, रुपए में कमजोरी और RBI की सख्त लिक्विडिटी नीति ने हालात को और मुश्किल बना दिया। मार्च में रुपया 4.24% तक गिरा, जो छह साल की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे फाइनेंशियल कंडीशन टाइट हुई और बैंकों की लेंडिंग व मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

बिकवाली का असर केवल बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं रहा। ऑटो, कंस्ट्रक्शन और मेटल सेक्टर में भी हजारों करोड़ रुपए की निकासी दर्ज की गई, जबकि FMCG, रियल्टी और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर भी दबाव से नहीं बच पाए।

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