Edited By jyoti choudhary,Updated: 08 Oct, 2026 02:40 PM

दुनियाभर में डीजल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत का डीजल एक्सपोर्ट सितंबर में एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। भारत ने इस दौरान यूरोप, अफ्रीका और एशिया समेत कई बाजारों में बड़े पैमाने पर डीजल की सप्लाई की। कमोडिटी एनालिटिक्स
नई दिल्लीः दुनियाभर में डीजल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत का डीजल एक्सपोर्ट सितंबर में एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। भारत ने इस दौरान यूरोप, अफ्रीका और एशिया समेत कई बाजारों में बड़े पैमाने पर डीजल की सप्लाई की। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के मुताबिक, सितंबर में भारत से रोजाना करीब 6.2 लाख बैरल डीजल का निर्यात हुआ।
इस एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा हिस्सा यूरोप पहुंचा। कुल शिपमेंट में करीब आधा हिस्सा यूरोपीय देशों को भेजा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से यूरोप को रोजाना लगभग 2.8 लाख बैरल डीजल का निर्यात हुआ, जो अगस्त के मुकाबले करीब 80% अधिक है।
अफ्रीका और एशिया को भी बड़ी सप्लाई
सितंबर में भारत ने अफ्रीकी ग्राहकों को रोजाना करीब 2 लाख बैरल डीजल भेजा। वहीं, एशियाई देशों को लगभग 50 हजार बैरल और अमेरिका को करीब 40 हजार बैरल की सप्लाई हुई। लगभग 50 हजार बैरल का डीजल ऐसे गंतव्यों पर गया, जिनकी पहचान उपलब्ध आंकड़ों में नहीं की गई है। केप्लर के अनुसार, इस दौरान रूस को भारत से डीजल का कोई निर्यात नहीं हुआ।
डीजल मार्जिन बढ़ने से रिफाइनरों को फायदा
डीजल की बढ़ती कीमतों और मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन ने भारत से निर्यात को बढ़ावा दिया। केप्लर के रिफाइनिंग लीड एनालिस्ट निखिल दुबे के मुताबिक, सितंबर में दुबई की तुलना में सिंगापुर डीजल क्रैक स्प्रेड 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था। इससे रिफाइनरों को डीजल का उत्पादन बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा निर्यात करने का मजबूत प्रोत्साहन मिला।
सप्लाई में कमी से बढ़ी कीमतें
सितंबर में बेंचमार्क डीजल की कीमतें एक साल पहले की तुलना में करीब दोगुनी थीं। पश्चिम एशिया और रूस में रिफाइनरी तथा शिपिंग से जुड़ी बाधाओं के कारण वैश्विक बाजार में डीजल की सप्लाई प्रभावित हुई। इसी बीच चीन ने भी सप्लाई की कमी और बढ़ती कीमतों के बीच डीजल एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल में यूरोपीय देशों से अपने रणनीतिक रिजर्व से डीजल जारी करने को कहा था। इससे यूरोप में ईंधन की कमी को लेकर बढ़ती चिंता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
रिलायंस को मिला बड़ा फायदा
भारत के डीजल एक्सपोर्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी की अहम भूमिका है। सितंबर में डीजल पर करीब 37 डॉलर प्रति बैरल का विंडफॉल टैक्स लगाया गया था, जिसने वैश्विक बाजार में उपलब्ध मार्जिन का बड़ा हिस्सा कम कर दिया।
हालांकि, रिलायंस की जामनगर की वह यूनिट जो मुख्य रूप से एक्सपोर्ट के लिए काम करती है, इस टैक्स के दायरे से बाहर है। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में मजबूत डीजल मार्जिन का फायदा उठाने में भारत की सबसे बड़ी एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड रिफाइनरी को बढ़त मिली।