भारतीय कपास व्यापार अब सामान्य स्थिति में

Edited By Updated: 24 Feb, 2020 12:17 PM

indian cotton trade is now in a normal state

भारत दुनिया में व्हाइट गोल्ड का सबसे बड़ा उत्पादक देश है जिस कारण भारतीय टैक्सटाइल्ज व स्पिनिंग उद्योग को व्हाइट गोल्ड की कोई कमी नहीं है। देश में चालू कपास सीजन साल 2019-20 में उत्पादन के अलग-अलग आंकड़े आ रहे हैं। कपड़ा मंत्रालय के कॉटन एडवाइजरी...

जैतोः भारत दुनिया में व्हाइट गोल्ड का सबसे बड़ा उत्पादक देश है जिस कारण भारतीय टैक्सटाइल्ज व स्पिनिंग उद्योग को व्हाइट गोल्ड की कोई कमी नहीं है। देश में चालू कपास सीजन साल 2019-20 में उत्पादन के अलग-अलग आंकड़े आ रहे हैं। कपड़ा मंत्रालय के कॉटन एडवाइजरी बोर्ड (सी.ए.बी.) ने इस सीजन के दौरान उत्पादन 360 लाख गांठ होने की सम्भावना जताई है। सी.ए.बी. के अनुसार कपास सीजन साल 2018-19 में उत्पादन 330 लाख गांठ रहा था। भारतीय कपास संघ (सी.ए.आई.) के मुताबिक देश में चालू सीजन में उत्पादन 354.50 लाख गांठ व्हाइट गोल्ड का रहेगा।

दूसरी तरफ अन्य रूई कारोबारियों का मानना है कि देश के उत्पादन 385 से 390 लाख गांठ से ऊपर होगा। सूत्रों के अनुसार, देश में चालू कपास सीजन 1 अक्तूबर से लेकर अब तक 250 से 260 लाख गांठों का व्हाइट गोल्ड आने के कयास लगाए जा रहे हैं जिसमें भारतीय कपास निगम (सी.सी.आई.) ने 67.30 लाख गांठों से अधिक व महाराष्ट्र फैडरेशन ने 8.30 लाख गांठों का नरमा खरीदा है। 

सी.सी.आई. ने लगभग 80 प्रतिशत व्हाइट गोल्ड तेलंगाना में कुल आमद का खरीदा है। कपास निगम के पास पिछले साल भी लगभग 9 लाख गांठें व्हाइट गोल्ड की स्टाक में पड़ी हैं। इस बीच बड़े रूई कारोबारी जे.पी.टी. बठिंडा के सतीश शर्मा के अनुसार अब तक उत्तरी क्षेत्रीय राज्यों की मंडियों में लगभग 54,02,000 गांठों का व्हाइट गोल्ड पहुंच चुका है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रधान अतुल भाई गणत्रा के अनुसार कोरोना वायरस के डर से भारतीय कपास उद्योग व्यापार अब सामान्य स्थिति में वापस आ रहा है। इस सीजन साल 2019-20 में भारत से विभिन्न देशों को कुल निर्यात 42 से 45 लाख गांठ व्हाइट गोल्ड का एसोसिशएन ने अनुमान आंका है। अब तक लगभग 28 लाख गांठों का निर्यात किया जा चुका है। 

गणत्रा के अनुसार, भारत के बंगलादेश, वियतनाम और इंडोनेशिया व अन्य निर्यात गंतव्य हैं जिसमें सर्वाधिक निर्यात 20-22 लाख गांठ बंगलादेश को और 7-8 लाख व्हाइट गोल्ड वियतनाम में जाती हैं तथा अन्य गांठें दूसरे देशों को निर्यात होती हैं।

रूई बाजार ने फिर बदले तेवर
रूई बाजार ने एक बार फिर अपने तेवर बदल लिए हैं। रूई मंदडिय़ों का सपना था कि चीन कोरोना वायरस के कारण यार्न में 10 रुपए किलो मंदा आने से इसका सीधा असर हाजिर रूई पर होगा लेकिन इस हफ्ते रूई कीमतों में 50-60 रुपए मन तेजी रही। तेजी आने से अधिकतर कताई मिलों ने बाजार से मुंह फेरे रखा। तेजी का रुख चलने के बावजूद भी कपास जिनर (रूई बिकवाल) फिलहाल बड़ी तेजी में नहीं है।   

कपड़ा मंत्रालय भारी पड़ा टैक्सटाइल्ज उद्योग पर
केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय  भारतीय टैक्सटाइल्ज उद्योग व स्पिनिंग उद्योग पर भारी पड़ा हुआ है जबकि कपड़ा मंत्रालय टैक्सटाइल्ज उद्योग की भलाई के लिए गठित किया गया है। सूत्रों के अनुसार कपड़ा मंत्रालय ने अपने उपक्रम भारतीय कपास निगम लि. (सी.सी.आई.) को कमर्शियल रूप में व्हाइट गोल्ड खरीदने की छूट दी गई है। सी.सी.आई. द्वारा अब तक 67 लाख गांठों से ज्यादा का नरमा खरीदा जा चुका है, जिससे भारतीय टैक्सटाइल्ज उद्योग पर भारी आर्थिक चोट लगी है क्योंकि सी.सी.आई. ने अपनी रूई गांठों का सेल भाव हाजिर रूई से 600-700 रुपए मन भाव अधिक रखा है जबकि टैक्सटाइल्ज उद्योग समूह का कहना है कि आजकल हाजिर रूई भाव 4030-4085 में ही हानि उठानी पड़ रही है। केन्द्र सरकार की रूई गांठों का स्टाक करना कोई मजबूरी नहीं है, जबकि रूई गांठों का स्टाक से भारत की टैक्सटाइल्ज उद्योग पर बड़ा बुरा असर पड़ा है।

9 लाख गांठों का स्टाक गोदाम में हो रहा खराब
सरकार के बड़े अधिकारियों की लापरवाही के कारण सी.सी.आई. के पास लगभग 9 लाख गांठों का स्टाक गोदामों में खराब हो रहा है। यह स्टाक हजारों-करोड़ों रुपयों का आंका जाता है जो पिछले साल का गोदामों में पड़ा है जिससे सरकार को अब तक मोटा आर्थिक नुक्सान हो चुका है। सरकार को इस नुक्सान के लिए संबंधित सी.सी.आई. अधिकारियों को जिम्मेदार मानना चाहिए। रूई कारोबारियों का कहना है कि केन्द्र सरकार का किसानों का व्हाइट गोल्ड एम.एस.पी. पर खरीदना एक बड़ा अच्छा निर्णय है लेकिन कपड़ा मंत्रालय को रूई गांठ सेल नीति भी साथ-साथ बनानी चाहिए। सरकार विभिन्न फसलें एम.एस.पी. पर खरीदती है लेकिन सरकार की गलत नीतियों के कारण इसका उद्योगों पर बड़ा बुरा असर देखने को मिलता है। सरकार की गलत नीतियों के कारण भारतीय टैक्सटाइल्ज व स्पिनिंग उद्योग आज भारी संकट से गुजर रहा है। सरकार किसानों की मदद करना चाहती है तो वह किसानों को 500-600 रुपए क्विंटल बोनस दे ताकि सभी किसानों को इसका लाभ मिल सके लेकिन अब तक किसानों को ही एम.एस.पी. का भाव मिल रहा है। जहां सी.सी.आई. की नरमा की खरीद है।

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