Edited By jyoti choudhary,Updated: 23 Oct, 2026 11:15 AM

केंद्र सरकार चार सरकारी बैंकों सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य इन बैंकों में न्यूनतम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम को पूरा
नई दिल्लीः केंद्र सरकार चार सरकारी बैंकों सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य इन बैंकों में न्यूनतम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम को पूरा करना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सरकारी बैंकों के संभावित विलय और दो अन्य बैंकों के निजीकरण की दिशा में भी कदम उठा सकती है।
तीन से चार बड़े सरकारी बैंक रखने का लक्ष्य
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की दीर्घकालिक योजना देश में तीन से चार बड़े सरकारी बैंक बनाए रखने की है। इसी रणनीति के तहत बैंकों के विलय और निजीकरण की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। नीति आयोग ने निजीकरण के संभावित उम्मीदवारों के तौर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को शॉर्टलिस्ट किया है।
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अगले एक साल में हिस्सेदारी घटाने पर जोर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल प्राथमिकता अगले एक साल में चारों बैंकों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने की है। इसके लिए बैंक अपनी जरूरतों और रणनीतियों के अनुसार बाजार से पूंजी जुटा सकते हैं। वहीं, सरकार बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने पर भी विचार कर रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बैंकों में पब्लिक फ्लोट बढ़ने से शेयरों की बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है और उनके वैल्यूएशन में सुधार होने की संभावना है।
विलय में इन पहलुओं पर होगा विचार
सरकारी बैंकों के संभावित विलय की प्रक्रिया में तकनीकी प्रणालियों की अनुकूलता, भौगोलिक पहुंच और कारोबार की प्रकृति जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में संबंधित बैंकों से भी सुझाव लिए जा सकते हैं, ताकि विलय की प्रक्रिया को व्यावहारिक और प्रभावी बनाया जा सके।
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निजीकरण के लिए कानून में बदलाव जरूरी
सरकारी बैंकों के निजीकरण के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन करना होगा। इसमें बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम में बदलाव भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इन विधायी संशोधनों को बैंकों के विलय की प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ाने पर विचार कर सकती है।
IDBI बैंक में हिस्सेदारी बिक्री भी चर्चा में
सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में IDBI बैंक के अलावा दो सरकारी बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण की घोषणा की थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स द्वारा IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी के 52,878 करोड़ रुपए में अधिग्रहण की जानकारी सामने आई है।
न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम में राहत
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने वित्तीय संस्थानों समेत सरकारी कंपनियों को अगस्त 2026 तक न्यूनतम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग की अनिवार्यता से छूट दी थी। इस छूट को आगे बढ़ाने के लिए नई अधिसूचना जारी किए जाने की संभावना भी जताई गई है।