Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 Oct, 2026 02:43 PM

आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के बाद केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) बैंक में सार्वजनिक शेयरधारक बने रहेंगे। उनकी हिस्सेदारी अधिकतम 15 प्रतिशत तक सीमित होगी और उन्हें बैंक के निदेशक मंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा।
नई दिल्लीः आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के बाद केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) बैंक में सार्वजनिक शेयरधारक बने रहेंगे। उनकी हिस्सेदारी अधिकतम 15 प्रतिशत तक सीमित होगी और उन्हें बैंक के निदेशक मंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने यह जानकारी देते हुए कहा कि रणनीतिक पुनर्गठन के बाद बैंक के संचालन और जरूरत पड़ने पर उसमें अतिरिक्त पूंजी डालने की जिम्मेदारी खरीदार की होगी।
फेयरफैक्स को 60.72% हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी
सरकार ने पिछले सप्ताह कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड को आईडीबीआई बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी थी। इस सौदे का मूल्य करीब 53,000 करोड़ रुपए है। इसमें सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 26,620 करोड़ रुपए में और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,440 करोड़ रुपए में बेचेगी।
कनाडा के अरबपति प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स प्रति शेयर 81 रुपए का भुगतान करेगी। यह दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा निर्धारित 75.99 रुपए प्रति शेयर के संदर्भ उचित मूल्य से अधिक है।
सार्वजनिक शेयरधारकों को नहीं मिलेगा बोर्ड में प्रतिनिधित्व
दीपम सचिव चावला के अनुसार, सरकार और एलआईसी सार्वजनिक शेयरधारक के रूप में बैंक में बने रहना चाहते हैं। इसके लिए उनकी इक्विटी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और वे निदेशक मंडल में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि अन्यथा बैंक के प्रति उनकी संभावित देनदारी प्रवर्तक के समान हो सकती है।
चावला ने बताया कि बाजार नियामक ने एलआईसी को आईडीबीआई बैंक में अपनी मौजूदा 19 प्रतिशत हिस्सेदारी घटाकर 15 प्रतिशत करने का निर्देश दिया है। इससे सार्वजनिक शेयरधारिता में चार प्रतिशत की वृद्धि होगी और खुदरा निवेशकों सहित अन्य निवेशकों के लिए अधिक शेयर उपलब्ध होंगे।
खुदरा निवेशकों के हितों की होगी रक्षा
सौदे के तहत शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद रणनीतिक खरीदार को अल्पांश शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश करनी होगी। इससे छोटे निवेशकों को लागू नियमों के अनुसार अपने शेयर बेचने का अवसर मिलेगा। चावला ने भरोसा दिलाया कि लेनदेन में अल्पांश और खुदरा शेयरधारकों के हितों की रक्षा की जाएगी।
वित्त वर्ष के अंत तक सौदा पूरा होने की उम्मीद
आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। शुरुआती बोलियां आरक्षित मूल्य से कम रहने के कारण प्रक्रिया को इस साल की शुरुआत में झटका लगा था। अब सौदे को मंजूरी मिलने के बाद इसे आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
लेनदेन चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नियामकीय मंजूरी जरूरी होगी। यह सौदा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश और सरकारी हिस्सेदारी घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।