Edited By jyoti choudhary,Updated: 04 Feb, 2026 11:58 AM

सोने-चांदी की कीमतों (Gold–Silver Price) में बुधवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। इसी बीच सरकार ने इन कीमती धातुओं के आयात को लेकर बड़ी राहत दी है। सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले बेस इंपोर्ट...
बिजनेस डेस्कः सोने-चांदी की कीमतों (Gold–Silver Price) में बुधवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। इसी बीच सरकार ने इन कीमती धातुओं के आयात को लेकर बड़ी राहत दी है। सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले बेस इंपोर्ट प्राइस (आधार आयात मूल्य) में कटौती कर दी है।
क्या असर पड़ेगा
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने एक अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब बनी हुई हैं। सरकार के इस कदम से आयातकों पर कस्टम ड्यूटी का बोझ कुछ हद तक कम होगा।
क्या हो गया है नया बेस प्राइस
CBIC के मुताबिक, सोने का बेस इंपोर्ट प्राइस 49 डॉलर प्रति 10 ग्राम घटाकर 1,518 डॉलर कर दिया गया है। वहीं, चांदी के बेस इंपोर्ट प्राइस में 870 डॉलर प्रति किलोग्राम की कटौती की गई है, जिसके बाद यह 2,675 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गया है।
नई दरें तय टैरिफ हेडिंग्स के तहत किसी भी रूप में आयात किए जाने वाले सोने और चांदी पर लागू होंगी। इस कटौती का लाभ हाई-प्योरिटी गोल्ड बार और कॉइन, साथ ही सिल्वर बुलियन और मेडेलियन पर मिलेगा। हालांकि, गहनों, कीमती धातुओं से बनी अन्य वस्तुओं और पोस्ट, कूरियर या बैगेज के जरिए होने वाले आयात पर यह राहत लागू नहीं होगी।
पहले कब बदला गया था बेस प्राइस
इससे पहले चांदी का बेस इंपोर्ट प्राइस 27 जनवरी 2026 को बदला गया था, जबकि सोने का बेस प्राइस आखिरी बार 22 जनवरी 2026 को तय किया गया था। आमतौर पर सरकार हर पखवाड़े यानी दो सप्ताह में कीमती धातुओं के बेस इंपोर्ट प्राइस की समीक्षा करती है।
सोने-चांदी के बड़े खरीदार हैं भारतीय
भारत इस समय दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जबकि चांदी के मामले में भारत सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। देश में सोने की लगभग पूरी मांग आयात से पूरी होती है, वहीं चांदी की 80 प्रतिशत से अधिक जरूरतें भी विदेशी आपूर्ति पर निर्भर हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल भारत ने अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब दसवां हिस्सा सोना और चांदी के आयात पर खर्च किया था। अनुमान है कि 2026 तक यह इंपोर्ट बिल और बढ़ सकता है।