सरसों किसानों के लिए राहत के संकेत, रकबा बढ़ा, उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 06:29 PM

signs of relief for mustard farmers acreage increases and production

इस साल सरसों किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आ रही है। सरसों के रकबा में 3 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब तक मौसम भी फसल के अनुकूल बना हुआ है। हालिया बारिश से सरसों की फसल को फायदा मिलने की उम्मीद है। मौजूदा हालात को देखते हुए इस साल...

नई दिल्लीः इस साल सरसों किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आ रही है। सरसों के रकबा में 3 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब तक मौसम भी फसल के अनुकूल बना हुआ है। हालिया बारिश से सरसों की फसल को फायदा मिलने की उम्मीद है। मौजूदा हालात को देखते हुए इस साल सरसों के उत्पादन में करीब 10 फीसदी तक इजाफा हो सकता है और पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।

सरसों का रकबा 3.2% बढ़ा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल देश में 89.36 लाख हेक्टेयर में सरसों की बोआई हो चुकी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 86.57 लाख हेक्टेयर था। इस तरह सरसों के रकबा में 3.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरसों का सामान्य रकबा 79.17 लाख हेक्टेयर माना जाता है। इसके मुकाबले इस साल करीब 12.5 फीसदी ज्यादा क्षेत्र में सरसों की खेती की गई है।

राज्यों में मिला-जुला रुझान

केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों में रकबा बढ़ने और घटने—दोनों तरह के रुझान देखने को मिले हैं।

  • राजस्थान में सरसों का रकबा मामूली बढ़कर 35.35 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।
  • मध्य प्रदेश में 41 फीसदी की बड़ी छलांग के साथ रकबा 11.79 लाख हेक्टेयर हो गया है।
  • उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक में सरसों का रकबा लगभग तीन गुना बढ़कर 16.99 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।

हालांकि, उत्तर-पूर्वी राज्यों और झारखंड में चुनौतियां बनी हुई हैं। अनियमित बारिश और बोआई में देरी के कारण:

  • असम में रकबा घटकर 2.88 लाख हेक्टेयर
  • झारखंड में 3.52 लाख हेक्टेयर रह गया है।

उत्पादन में 10% बढ़ोतरी की उम्मीद

केडिया एडवाइजरी के अनुसार, 2025–26 में देश में सरसों का उत्पादन करीब 10 फीसदी बढ़ सकता है। इसकी वजह ज्यादा बोआई और फसल की अनुकूल स्थिति बताई जा रही है। सरकार ने इस साल सरसों उत्पादन का लक्ष्य 139 लाख टन रखा है, जबकि 2024–25 में उत्पादन 126.67 लाख टन रहा था।

मौसम ने दिया साथ

तिलहन उद्योग संगठन COOIT के चेयरमैन सुरेश नागपाल ने बताया कि इस बार सर्दी सरसों की फसल के लिए अनुकूल रही और मौजूदा बारिश भी फायदेमंद साबित हो रही है। अब तक पाला नहीं पड़ने से फसल को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। अगर आगे भी मौसम अनुकूल रहा, तो इस साल सरसों का उत्पादन रिकॉर्ड बना सकता है।

उद्योग के अनुमान के मुताबिक, इस साल सरसों का उत्पादन 120 लाख टन तक पहुंच सकता है, जो अब तक का उच्चतम स्तर होगा। इससे पहले 2023 में 115 लाख टन का रिकॉर्ड बना था, जबकि पिछले साल उत्पादन घटकर 111 लाख टन रह गया था।

ओलावृष्टि से बढ़ सकती है चिंता

हालांकि अब तक हालात अनुकूल रहे हैं लेकिन कुछ इलाकों में ओलावृष्टि किसानों की चिंता बढ़ा सकती है। केडिया एडवाइजरी के अनुसार, अधिकांश सरसों उत्पादक क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और अनुकूल तापमान फसल के लिए सहायक बने हुए हैं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के किसान दिनेश सिंह का कहना है कि इस समय बारिश सरसों के लिए बेहद फायदेमंद होती है। इससे नमी बढ़ती है और पैदावार बेहतर होती है। हालांकि, अगर आगे ओलावृष्टि नहीं हुई, तो इस साल सरसों की फसल काफी अच्छी होने की उम्मीद है।

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