Edited By jyoti choudhary,Updated: 08 Jan, 2026 12:21 PM

भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार, 8 जनवरी को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 450 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी फिसलकर 26,000 के अहम स्तर के नीचे चला गया।
बिजनेस डेस्कः भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार, 8 जनवरी को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 450 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी फिसलकर 26,000 के अहम स्तर के नीचे चला गया।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेत और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते बाजार का सेंटीमेंट दबाव में रहा।खबर लिखे जाने के समय बीएसई सेंसेक्स 617.08 अंक यानी 0.73 फीसदी की गिरावट के साथ 84,344.06 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 211.55 अंक या 0.81 फीसदी टूटकर 25,929.20 पर आ गया।
बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। सबसे ज्यादा दबाव मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों में रहा।
शेयर बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
बाजार पर दबाव का सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रही। बुधवार को एफआईआई ने करीब 1,527.71 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। जनवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशक लगभग 4,650 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं। इस दौरान सिर्फ एक दिन को छोड़कर हर सत्र में एफआईआई नेट सेलर रहे हैं।
2. कमजोर ग्लोबल संकेत
वैश्विक बाजारों से भी घरेलू बाजार को कोई खास सपोर्ट नहीं मिला। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जहां जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स लाल निशान में रहे। वहीं अमेरिकी बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के एनालिस्ट अभिषेक सराफ के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है।
3. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चिंता
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में निफ्टी करीब 0.7 फीसदी और सेंसेक्स लगभग 0.9 फीसदी टूट चुका है। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी है। अमेरिका पहले ही कई भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगा चुका है, जिनमें से 25 फीसदी टैरिफ रूस से कच्चा तेल आयात करने से जुड़ा बताया जा रहा है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार के अनुसार, अमेरिका-भारत व्यापार समझौता भारत की लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि और मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता के लिए बेहद अहम है। इस समझौते में देरी और एफआईआई की बिकवाली फिलहाल बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं।
4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 0.4 फीसदी बढ़कर 60.20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर आशंकाएं बढ़ा देती है।
5. सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी
गुरुवार को सेंसेक्स डेरिवेटिव्स की वीकली एक्सपायरी थी। एक्सपायरी के चलते ट्रेडर्स ने पोजिशन अनवाइंडिंग और रोलओवर किया, जिससे बाजार में वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव दोनों बढ़ गए। आमतौर पर एक्सपायरी वाले दिन बाजार की दिशा अनिश्चित रहती है और छोटी खबरों पर भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।