Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Apr, 2026 04:09 PM

हाईवे यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लागू कर दिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की नई अधिसूचना के मुताबिक 10 अप्रैल से टोल प्लाजा...
बिजनेस डेस्कः हाईवे यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लागू कर दिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की नई अधिसूचना के मुताबिक 10 अप्रैल से टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद हो जाएगा और सभी लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ही होंगे।
नई व्यवस्था के तहत अब FASTag को अनिवार्य कर दिया गया है यानी बिना वैध FASTag के कोई भी वाहन चालक नकद भुगतान नहीं कर पाएगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम में कमी आएगी और यात्रा अधिक तेज व सुगम होगी।
डिजिटल भुगतान ही एकमात्र विकल्प
नई प्रणाली में टोल का भुगतान मुख्य रूप से FASTag या अन्य डिजिटल माध्यमों से करना होगा। जिन वाहनों में FASTag नहीं होगा, वे वैकल्पिक रूप से UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे लेकिन उन्हें 25 प्रतिशत अधिक शुल्क देना होगा। वहीं, भुगतान न करने या असफल रहने की स्थिति में वाहन को रोका जा सकता है और ई-नोटिस जारी किया जा सकता है। तीन दिन के भीतर भुगतान न होने पर दोगुना शुल्क वसूला जाएगा।
टोल छूट के नियम सख्त
सरकार ने टोल छूट के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियमों को और सख्त किया है। अब टोल छूट व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि केवल अधिकृत सरकारी वाहनों या आधिकारिक उपयोग को ही मिलेगी। पात्र लोगों को “Exempted FASTag” लेना अनिवार्य होगा, जिससे पहचान संबंधी विवाद और देरी में कमी आने की उम्मीद है।
नियमित यात्रियों के लिए सालाना पास
नियमित यात्रियों के लिए 3,075 रुपए का वार्षिक फास्टैग पास भी उपलब्ध है, जिसमें 200 यात्राएं शामिल हैं। सरकार इसे भविष्य की बिना रुकावट वाली टोल प्रणाली की दिशा में अहम कदम मान रही है। यह सुविधा रोजाना यात्रा करने वालों के लिए किफायती साबित हो सकती है, जबकि कम यात्रा करने वालों के लिए सामान्य भुगतान बेहतर विकल्प रहेगा।