Edited By Prachi Sharma,Updated: 22 Jan, 2026 11:05 AM

Ayodhya Ram Mandir : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को शुरुआत में राम मंदिर निर्माण के लिए 70 एकड़ भूमि दी गई थी। इसके बाद ट्रस्ट ने 7,285 वर्गफुट अतिरिक्त जमीन खरीदी, जिससे मंदिर परिसर का कुल क्षेत्रफल बढ़कर लगभग 107 एकड़ हो गया। इसमें से...
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Ayodhya Ram Mandir : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को शुरुआत में राम मंदिर निर्माण के लिए 70 एकड़ भूमि दी गई थी। इसके बाद ट्रस्ट ने 7,285 वर्गफुट अतिरिक्त जमीन खरीदी, जिससे मंदिर परिसर का कुल क्षेत्रफल बढ़कर लगभग 107 एकड़ हो गया। इसमें से करीब 20 एकड़ में निर्माण कार्य किया गया है, जबकि लगभग 50 एकड़ क्षेत्र को खुला रखा गया है। इसके अलावा लगभग 30 एकड़ भूमि को हरित क्षेत्र यानी ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया गया है।
तीन मंजिला भव्य राम मंदिर
राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह मंदिर तीन मंजिला है, जिसकी ऊंचाई करीब 161 फीट, चौड़ाई लगभग 235 फीट और लंबाई करीब 360 फीट है। इसकी भव्य संरचना पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण मानी जा रही है।
हजार वर्षों तक सुरक्षित रहने की क्षमता
मंदिर के निर्माण में ऐसी विशेष तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह आने वाले हजार सालों तक आंधी, तूफान, भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर सके। विशेषज्ञों के अनुसार, मंदिर की डिजाइन इसे अत्यंत मजबूत और टिकाऊ बनाती है।
बिना लोहे और कील के हुआ निर्माण
राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी देश की प्रमुख कंपनियों और संस्थानों को सौंपी गई थी। एलएंडटी और टाटा जैसी कंपनियों के साथ-साथ आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों ने भी इसमें सहयोग किया। खास बात यह है कि मंदिर के निर्माण में कहीं भी लोहे या कीलों का उपयोग नहीं किया गया, ताकि जंग लगने की कोई संभावना न रहे।
56 परतों से तैयार की गई मजबूत नींव
राम मंदिर की नींव को असाधारण रूप से मजबूत बनाने के लिए 56 परतों में पत्थरों की संरचना तैयार की गई है। नींव को करीब 40 फीट की गहराई तक बनाया गया है, जिसमें 23 हजार से अधिक पत्थरों के साथ मिट्टी, रेत, कंकड़ और सीमेंट का मिश्रण इस्तेमाल किया गया है।
भूकंप और नमी से सुरक्षा की विशेष व्यवस्था
मंदिर का चबूतरा जमीन से करीब 21 फीट ऊंचा बनाया गया है और इसमें ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग किया गया है, ताकि नमी का असर मंदिर पर न पड़े। भूकंप से सुरक्षा के लिए पत्थरों को जोड़ने में लोहे या कंक्रीट की जगह इंटरलॉकिंग तकनीक अपनाई गई है।
56 महीनों तक चला निर्माण कार्य
राम मंदिर के निर्माण में करीब 5,000 से अधिक कारीगरों ने लगभग 56 महीनों तक दिन-रात मेहनत की। मंदिर के निर्माण में राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से लाए गए सैंडस्टोन का उपयोग किया गया है। वहीं, बंदरों और पक्षियों से सुरक्षा के लिए लगाई गई जालियां भी टाइटेनियम से बनाई गई हैं, जो इसकी आधुनिक और टिकाऊ संरचना को दर्शाती हैं।