Edited By Sarita Thapa,Updated: 21 Jun, 2026 04:16 PM

भगवान शिव के हर मंदिर में आपने नंदी महाराज को जरूर देखा होगा। शिवलिंग के सामने शांत मुद्रा में विराजमान नंदी केवल भगवान शिव के वाहन ही नहीं, बल्कि उनके सबसे प्रिय भक्त और द्वारपाल भी माने जाते हैं।
Biggest nandi statue in india : भगवान शिव के हर मंदिर में आपने नंदी महाराज को जरूर देखा होगा। शिवलिंग के सामने शांत मुद्रा में विराजमान नंदी केवल भगवान शिव के वाहन ही नहीं, बल्कि उनके सबसे प्रिय भक्त और द्वारपाल भी माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कहने से वह सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है। यही कारण है कि शिव भक्त नंदी के प्रति भी उतनी ही श्रद्धा रखते हैं जितनी भगवान भोलेनाथ के प्रति। भारत में ऐसे कई प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर मौजूद हैं, जहां स्थापित नंदी महाराज की मूर्तियां अपने विशाल आकार, अद्भुत शिल्पकला और धार्मिक महत्व के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। इनमें से कुछ मूर्तियां एक ही पत्थर को तराशकर बनाई गई हैं, तो कुछ सदियों पुरानी होने के बावजूद आज भी लोगों को अपनी भव्यता से आश्चर्यचकित कर देती हैं। तो आइए जानते हैं भारत के उन प्रसिद्ध शिव मंदिरों के बारे में, जहां नंदी महाराज की सबसे विशाल और भव्य मूर्तियां स्थापित हैं।
महानंदीश्वर स्वामी मंदिर
आंध्र प्रदेश के कुरनूल में महानंदीश्वर स्वामी मंदिर नल्लामाला पहाड़ियों के पीछे एक गांव है, वहां स्थित है। बता दें कि यह मंदिर अपनी दक्षिणी वास्तुकला के साथ अपने ताजे पानी के पूल के लिए प्रसिद्ध ह। इस मंदिर में नंदी महाराज की विशाल प्रतिमा स्थापित है, जिसे दक्षिण भारत की प्रमुख नंदी प्रतिमाओं में गिना जाता है। बता दें कि इस मंदिर में 15 फीट लंबी और 10 फीट ऊंची है।
लेपाक्षी मंदिर
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इस मंदिर में भगवान शिव के प्रिय गण नंदी जी की बड़ी मूर्ति स्थापित है। मंदिर में स्थापित मूर्ति ग्रेनाइट के एक ही पत्थर को तराश के बनाई गई है जो लगभग 27 फीट लंबी और 15 फीट ऊंची है। यह प्रतिमा लेपाक्षी मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर स्थित है और मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है।
बुल टेंपल
कर्नाटक राज्य की राजधानी बेंगलुरु में स्थित यह बैल मंदिर स्वयं नंदी महाराज को समर्पित है। इस मंदिर में नंदी जी की विशाल मूर्ति स्थापित है,जो काफी प्रसिद्ध मानी जाती है। बता दें कि इस मंदिर में स्थित नंदी की मूर्ति ग्रेनाइट की एक विशाल शिला को तराशकर बनाया गया है। बता दें कि यहा स्थापित नंदी की मूर्ति 15 फीट ऊंची और 20 फीट लंबी है।

चामुंडी मंदिर
कर्नाटक के मैसूर में चामुंडी पहाड़ियों की चोटी पर बसा है जिसे चामुंडी मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर मां दूर्गा के चामुंडा रुप को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी स्थान पर देवी दूर्गा ने महिषासुर का वध किया था। बता दें कि मंदिर के जाने वाले रास्ते में लगभग 800वीं सीढ़ी पर एक शिव मंदिर के सामने विशालकाय नंदी की प्रतिमा है। यह भारत की प्रमुख विशाल नंदी प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है।
बृहदीश्वर मंदिर
अगला मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित है जिसे बृहदीश्वर मंदिरके नाम से जाना जाता है। बता दें कि यहां पर स्थापित नंदी की मूर्ति 11वीं सदी में चोल राजाओं के द्वारा स्थापित की गई थी। यहां पर स्थापित नंदी जी की मूर्ति 13 फीट ऊंची, 16 फीट लंबी और 12 फीट चौड़ी है। इसका कुल वज़न 25 टन है और इस प्रतिमा को कठोर ग्रेनाइट चट्टान को तराश कर बनाया गया है।
गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर
तमिलनाडु के अरियालुर जिले में स्थित गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में भी नंदी महाराज की विशालकाय प्रतिमा देखने को मिलती है। बता दें कि यह मूर्ति एक ही पत्थर को तराशकर बनाई गई है, जिसे उत्कृष्ट चोल कलाकृतियों में एक माना जाता है। बात करें इस प्रतिमा के आकार की तो यह मूर्ति कुल 11 फीट ऊंची और 15 फीट लंबी बताई जाती है। नंदी महाराज की यह प्रतिमा मुख्य गर्भगृह यानी के शिवलिंग से 200 मीटर की दूरी पर आंगन में खुली छत के नीचे स्थापित है।

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