Maha Shivratri 2026 : काशी में रचेगा इतिहास, पहली बार मथुरा से बाबा विश्वनाथ के लिए आएंगे विवाह वस्त्र और प्रसाद

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 08:37 AM

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Maha Shivratri 2026 : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस बार काशी में एक विशेष और ऐतिहासिक परंपरा देखने को मिलेगी। पहली बार भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा की ओर से बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ के विवाह के लिए विशेष उपहार भेजे जाएंगे। मान्यता है कि भगवान...

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Maha Shivratri 2026 : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस बार काशी में एक विशेष और ऐतिहासिक परंपरा देखने को मिलेगी। पहली बार भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा की ओर से बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ के विवाह के लिए विशेष उपहार भेजे जाएंगे। मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने प्रिय मित्र और आराध्य महादेव को उनके विवाह पर भेंट अर्पित करेंगे।

15 फरवरी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि के लिए मथुरा से बाबा के विवाह वस्त्र, शृंगार सामग्री, लड्डू, मिठाइयां, पंचमेवा, फलाहारी प्रसाद, फल-फूल और धातु के पात्र भेजे जाएंगे। यह पावन सामग्री 8 फरवरी को सूर्योदय के बाद एक सुसज्जित वाहन से वाराणसी के लिए रवाना होगी और 9 फरवरी को काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। इस अवसर पर ब्रजवासी पुष्पवर्षा कर इस मंगल यात्रा को विदा करेंगे और हरि-हर स्वरूप का स्मरण कर पूजा-अर्चना करेंगे।

परंपरा से जुड़ा आपसी संबंध
अब तक मथुरा से रंगभरी एकादशी के अवसर पर बाबा को अबीर-गुलाल भेजने की परंपरा रही है। पिछले वर्ष काशी विश्वनाथ ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बीच आपसी सहमति के बाद उपहारों के आदान-प्रदान की परंपरा को और मजबूत किया गया। इसके तहत रंगभरी एकादशी और होली पर दोनों धामों के बीच धार्मिक उपहार भेजे जाते रहे हैं।

पिछले वर्ष काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से लड्डू गोपाल के लिए भस्म, अबीर-गुलाल, फल-फूल, मिठाइयाँ, वस्त्र और चॉकलेट भेंट की गई थीं। इन सभी सामग्रियों को पहले बाबा के ज्योतिर्लिंग पर अर्पित कर मथुरा भेजा गया था। इस परंपरा के अनुसार, आदान-प्रदान के लिए रविवार का दिन तय किया गया है।

त्र्यंबकेश्वर से आएगी शगुन की हल्दी
महाशिवरात्रि से पहले 13 फरवरी को बाबा विश्वनाथ को शगुन की हल्दी अर्पित की जाएगी। यह विशेष हल्दी महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग से मंगाई गई है। इस दिन शाम को टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास पर बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा का विधिवत पूजन किया जाएगा।
लोकपरंपरा के अनुसार, हर वर्ष काशीवासी बाबा के शगुन से जुड़े आयोजनों का दायित्व निभाते हैं। मान्यता है कि वसंत पंचमी से ही बाबा के विवाह से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाती है।
नासिक से लाई गई हल्दी को पारंपरिक विधि से बांसफाटक स्थित धर्म-निवास से होते हुए पूर्व महंत के आवास तक लाया जाएगा। इसके बाद बड़े शीतला माता मंदिर के महंत के नेतृत्व में बाबा को हल्दी और भोग अर्पित किया जाएगा।

वैदिक विधि से होगा विशेष पूजन
इस अवसर पर परिवार की वरिष्ठ सदस्य की उपस्थिति में 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष पूजा संपन्न कराई जाएगी। पं. वाचस्पति तिवारी के मार्गदर्शन में बाबा की पंचबदन प्रतिमा का विधिवत अभिषेक और आराधना की जाएगी।
इस प्रकार, महाशिवरात्रि 2026 पर काशी में धार्मिक परंपरा, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जिसमें मथुरा और वाराणसी की पावन परंपराएं एक-दूसरे से जुड़कर नए अध्याय की शुरुआत करेंगी।
 

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