Edited By Niyati Bhandari,Updated: 31 Jan, 2026 10:22 AM

Brihaspati Dev Temple Uttarakhand: उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां की हर पहाड़ी, हर घाटी और हर मंदिर किसी न किसी पौराणिक कथा और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा हुआ है। ऐसी ही एक दिव्य और रहस्यमयी जगह है देवगुरु पर्वत, जहां समुद्र तल से...
Brihaspati Dev Temple Uttarakhand: उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां की हर पहाड़ी, हर घाटी और हर मंदिर किसी न किसी पौराणिक कथा और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा हुआ है। ऐसी ही एक दिव्य और रहस्यमयी जगह है देवगुरु पर्वत, जहां समुद्र तल से लगभग 8000 फीट की ऊंचाई पर देवताओं के गुरु बृहस्पति देव का प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि ज्ञान, तपस्या और गुरु तत्व का भी प्रतीक माना जाता है।
देवगुरु पर्वत पर क्यों खास है बृहस्पति देव का मंदिर?
देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक में स्थित यह मंदिर देश के उन चुनिंदा स्थलों में शामिल है, जहां विशेष रूप से गुरु बृहस्पति की पूजा-अर्चना की जाती है। घने जंगलों, ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं और शांत वातावरण के बीच स्थित यह मंदिर साधना और ध्यान के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां आने मात्र से ही मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
कहां स्थित है बृहस्पति देव का यह पावन धाम?
राज्य: उत्तराखंड
जिला: नैनीताल
ब्लॉक: ओखलकांडा
ऊंचाई: लगभग 8000 फीट (समुद्र तल से)
देवगुरु पर्वत पर स्थित यह मंदिर आज भी अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिक गरिमा को संजोए हुए है।
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब-जब देवताओं पर संकट आता था या असुरों के साथ युद्ध की स्थिति बनती थी, तब देवगुरु बृहस्पति इसी पर्वत पर आकर तपस्या और चिंतन किया करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने यहीं पर कठोर तप कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था।
भगवान शिव की कृपा से ही बृहस्पति देव को देवताओं का गुरु और नवग्रहों में विशेष स्थान प्राप्त हुआ। मान्यता है कि इस पर्वत पर प्राचीन काल में कई महान ऋषि-मुनियों ने भी साधना की थी।
आज भी श्रद्धालु यहां गुरु दोष निवारण, ज्ञान वृद्धि और जीवन में मार्गदर्शन के लिए दर्शन करने आते हैं।
मंदिर से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं
ज्ञान और बुद्धि का केंद्र
विद्यार्थी, शिक्षक और शिक्षा से जुड़े लोग यहां विशेष रूप से दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि बृहस्पति देव के दर्शन से बुद्धि प्रखर होती है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।
गुरुवार का विशेष महत्व
हर बृहस्पतिवार को मंदिर में विशेष पूजा होती है। श्रद्धालु पीले वस्त्र, पीले फूल, चने की दाल और हल्दी अर्पित करते हैं।
गुरु दोष से मुक्ति
जिन जातकों की कुंडली में गुरु दोष होता है, वे यहां विशेष पूजा और दान करके लाभ प्राप्त करते हैं।
कैसे पहुंचें देवगुरु पर्वत?
सबसे पहले हल्द्वानी या काठगोदाम पहुंचें। वहां से भीमताल होते हुए ओखलकांडा के लिए बस या टैक्सी लें। मुख्य सड़क से मंदिर तक कुछ किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी होती है। यह यात्रा कठिन जरूर है, लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक अनुभव इसे यादगार बना देते हैं।