Garuda Purana Truth: अनैतिक संबंधों का फल क्या होता है? जानिए यमलोक की कठोर सजाएं, कांप जाएगी रूह

Edited By Updated: 16 Jan, 2026 11:08 AM

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Garuda Purana on Immoral Relationships: हिंदू धर्मग्रंथों में गरुड़ पुराण को जीवन, मृत्यु और कर्मों के फल का विस्तृत ग्रंथ माना गया है। यह 18 महापुराणों में से एक है, जिसमें भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के संवाद के माध्यम से पाप, पुण्य, स्वर्ग,...

Garuda Purana on Immoral Relationships: हिंदू धर्मग्रंथों में गरुड़ पुराण को जीवन, मृत्यु और कर्मों के फल का विस्तृत ग्रंथ माना गया है। यह 18 महापुराणों में से एक है, जिसमें भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के संवाद के माध्यम से पाप, पुण्य, स्वर्ग, नरक और आत्मा की यात्रा का गूढ़ वर्णन किया गया है। हाल के दिनों में गरुड़ पुराण में वर्णित कुछ कथाएं और चेतावनियां एक बार फिर चर्चा में हैं, जिनमें पराई स्त्री से अनैतिक संबंध बनाने वालों के लिए कठोर दंड का उल्लेख किया गया है।

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विवाह को क्यों माना गया है पवित्र बंधन?
हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिनमें विवाह एक अत्यंत पावन और आध्यात्मिक संस्कार माना गया है। विवाह केवल सामाजिक व्यवस्था नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और जिम्मेदारी का प्रतीक है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो व्यक्ति विवाह जैसे पवित्र बंधन को तोड़ता है और विश्वासघात का मार्ग अपनाता है, वह गंभीर पाप का भागी बनता है।

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गरुड़ पुराण क्या कहता है पराई स्त्री से संबंध पर?
गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी पत्नी को धोखा देता है या किसी पराई स्त्री से अनैतिक और कामवासना से प्रेरित संबंध बनाता है, उसे मृत्यु के बाद यमलोक में कठोरतम दंड भुगतना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति को धर्म और मर्यादा का उल्लंघन करने वाला माना गया है।

ग्रंथ के अनुसार, काम, वासना और लोभ में पड़कर जो व्यक्ति सामाजिक और नैतिक सीमाओं को तोड़ता है, उसकी आत्मा को तप्तसूर्मि नरक में भेजा जाता है।

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यमलोक में मिलती हैं ये भयावह सजाएं
गरुड़ पुराण में वर्णित दंडों के अनुसार—
तप्तसूर्मि नरक

इस नरक में आत्मा को दहकते हुए लाल लोहे की सूइयों जैसी पीड़ा सहनी पड़ती है। यह दंड उन आत्माओं को दिया जाता है, जिन्होंने अनैतिक संबंध बनाकर दूसरों की भावनाओं और धर्म की मर्यादा को ठेस पहुंचाई हो।

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अंधतामिस्र नरक
विश्वासघात करने वाली आत्माओं को अंधतामिस्र नरक में भेजा जाता है। यहां चारों ओर घोर अंधकार होता है और आत्मा को कांटों व विषैले जीवों से भरे मार्ग पर नंगे पांव चलना पड़ता है।

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व्रजदंश नरक
गरुड़ पुराण के अनुसार, इस नरक में विशालकाय और भयानक जीव होते हैं, जो आत्मा को लगातार पीड़ा पहुंचाते हैं। यह दंड तब तक दिया जाता है, जब तक व्यक्ति के सभी पापकर्मों का फल समाप्त नहीं हो जाता।

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कर्म का फल अटल है: गरुड़ पुराण का संदेश
गरुड़ पुराण का मूल उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि मानव को धर्म, संयम और मर्यादा के मार्ग पर चलने की चेतावनी देना है। ग्रंथ यह स्पष्ट करता है कि कर्म का फल निश्चित है और कोई भी व्यक्ति अपने किए गए कर्मों से बच नहीं सकता।

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