Hindu Nav Varsh: इतिहास के झरोखे से जानें हिंदू नव वर्ष से जुड़ी रोचक बातें

Edited By Updated: 10 Apr, 2024 08:10 AM

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भारतीय नवसम्वत्सर का आरंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। यह अत्यंत पवित्र तिथि है। इसी तिथि से पितामह ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था। चैत्र भारतीय नव वर्ष का प्रथम मास है।

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Hindu New Year: भारतीय नवसम्वत्सर का आरंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। यह अत्यंत पवित्र तिथि है। इसी तिथि से पितामह ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था। चैत्र भारतीय नव वर्ष का प्रथम मास है। ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि का प्रारंभ हुआ था और इसी दिन भारतवर्ष में काल गणना प्रारंभ हुई थी और इसी दिन प्रथम बार सृष्टि में सूर्योदय हुआ। 

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फाल्गुन और चैत्र मास वसंत ऋतु के माने गए हैं। चैत्र और वैशाख को मधुमास कहा गया है। फाल्गुन वर्ष का अंतिम मास है। अमावस्या के पश्चात चन्द्रमा जब मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में प्रकट होकर प्रतिदिन एक-एक कला बढ़ता हुआ 15वें दिन चित्रा नक्षत्र में पूर्णता को प्राप्त करता है, तब वह मास ‘चित्रा’ नक्षत्र के कारण ‘चैत्र’ कहलाता है। प्रतिपदा प्रथम तिथि को कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है- ‘पूर्णिमा’ के पश्चात, जिसे ‘कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा’ और ‘अमावस्या’ के पश्चात, जिसे ‘शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा’ कहा जाता है।

भारत का सर्वमान्य सम्वत् विक्रम सम्वत् है, जिसका प्रारंभ भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। इसी दिन से रात्रि की अपेक्षा दिन बड़ा होने लगता है। पुरातन धर्मग्रन्थों के अनुसार चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि ही सृष्टि की जन्मतिथि है और इसी प्रतिपदा तिथि दिन रविवार को सूर्योदय होने पर ब्रह्मा ने सृष्टि के निर्माण की शुरुआत की थी। 

इस दिन से सम्वत्सर का पूजन, वासंतिक नवरात्र, घटस्थापन, ध्वजारोपण, वर्षेश का फल पाठ आदि विधि-विधान किए जाते हैं। विक्रम सम्वत् का नामकरण सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर हुआ। उन्होंने उज्जयिनी में शकों पर अपनी विजय के उपलक्ष्य पर इस सम्वत् का नामकरण किया।

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चैत्र शुक्ल नवमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्मोत्सव और फिर चैत्र पूर्णिमा पर भगवान राम के सबसे प्रिय भक्त हनुमान की जयंती मनाई जाती है।

वैवस्वत मन्वन्तर के 27 महायुगों के कालखण्ड के बाद 28वें महायुग के सतयुग, त्रेता, द्वापर नामक तीन युग भी अपना कार्यकाल पूरा कर चौथे युग अर्थात कलियुग के 5026वें सम्वत् का प्रारम्भ हो रहा है।

इसी भांति विक्रम सम्वत् 2081 का भी श्रीगणेश हो गया है। इस बार भारतीय नववर्ष की शुरुआत 9 अप्रैल, मंगलवार से हुई है। चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि पर ही महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, माह और वर्ष की गणना करते हुए हिन्दू पंचांग की रचना की थी। इस तिथि से ही नए पंचांग प्रारंभ होते हैं।

युगों में प्रथम सत्युग का आरंभ भी इसी दिन से हुआ है। इस प्रकार भारतीय नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही माना जाता है और इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और सम्वत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है।

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