Edited By Prachi Sharma,Updated: 08 Jan, 2026 12:48 PM

Kharmas Remedies For Marriage : भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए इसे वर्जित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि में...
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Kharmas Remedies For Marriage : भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए इसे वर्जित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि में प्रवेश करते हैं तो बृहस्पति का प्रभाव कम हो जाता है। चूंकि गुरु वैवाहिक जीवन और सौभाग्य के कारक हैं इसलिए इस दौरान शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं। वर्ष 2026 में 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो रहा है। यदि आपकी या आपके घर में किसी की शादी में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, रिश्ते बनते-बनते टूट रहे हैं, या विवाह में अत्यधिक विलंब हो रहा है, तो 14 जनवरी से पहले किए गए कुछ विशेष उपाय आपके जीवन में शहनाइयों की गूंज ला सकते हैं। आइए जानते हैं खरमास के दौरान किए जाने वाले उन अचूक उपायों के बारे में, जो विवाह की बाधाओं को दूर करने में सहायक माने जाते हैं।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा
विवाह की बाधाओं को दूर करने के लिए खरमास में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना सबसे उत्तम मानी गई है। रोजाना सुबह स्नान के बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। गुरुवार के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। भगवान विष्णु को पीले फूल और माता लक्ष्मी को लाल गुलाब अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि जगत के पालनहार प्रसन्न हों, तो कुंडली के दोष शांत हो जाते हैं।
बृहस्पति देव को मजबूत करने के उपाय
विवाह के लिए गुरु ग्रह का अनुकूल होना अनिवार्य है। खरमास में गुरु ग्रह कमजोर स्थिति में होते हैं, इसलिए उन्हें बल देना चाहिए। 14 जनवरी से पहले किसी भी गुरुवार को चने की दाल, हल्दी, केसर, पीले वस्त्र और केले का दान करें। खरमास के गुरुवार को केले के पेड़ में जल अर्पित करें और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। ध्यान रखें कि खरमास में स्वयं केला खाने से परहेज करना चाहिए।

गौरी-शंकर की पूजा और रुद्राभिषेक
माना जाता है कि शिव और शक्ति के मिलन से ही संसार चलता है। विवाह में आ रही देरी को दूर करने के लिए खरमास में शिव-पार्वती की पूजा फलदायी होती है। मां पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
कन्याएं हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।" मंत्र का जाप करें।
खरमास में दान का विशेष महत्व
शास्त्रों के अनुसार, खरमास में किया गया दान अक्षय फल देता है और जीवन के अवरोधों को हटाता है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति आने वाली है, उससे पहले गरीबों को तिल, गुड़ और ऊनी कपड़ों का दान करें। यह शनि और सूर्य के दोषों को कम करता है, जो कई बार विवाह में देरी का कारण बनते हैं।
तुलसी पूजा और दीपदान
तुलसी को विष्णुप्रिया कहा जाता है। खरमास के दौरान शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाना और उसकी परिक्रमा करना अत्यंत शुभ होता है। तुलसी की जड़ की मिट्टी का तिलक माथे पर लगाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और विवाह के मार्ग की बाधाएं कम होती हैं।
गाय की सेवा
गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है। खरमास के दौरान रोज सुबह की पहली रोटी गुड़ के साथ गाय को खिलाएं। यदि संभव हो तो आटे की लोई में हल्दी और चने की दाल भरकर गाय को दें। यह उपाय बृहस्पति देव को अत्यंत प्रिय है।

क्यों जरूरी है 14 जनवरी से पहले ये उपाय करना ?
14 जनवरी 2026 को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इसी दिन से खरमास समाप्त हो जाएगा और धनुर्मास की नकारात्मकता खत्म होगी। ज्योतिषियों का मानना है कि जब कोई ग्रह अपनी राशि बदलता है या संक्रमण काल में होता है, तो उस समय की गई पूजा-अर्चना का फल शीघ्र मिलता है। खरमास के अंत में किए गए ये उपाय सोए हुए भाग्य को जगाने का काम करते हैं।