Magh Mela 2026 : बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए खास होगा माघ मेला, व्हीलचेयर से ई-रिक्शा तक की सुविधाओं का ऐसे उठाएं लाभ

Edited By Updated: 10 Jan, 2026 07:56 AM

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Magh Mela 2026 : संगम की पवित्र रेती पर माघ मेले की आध्यात्मिक छटा इन दिनों चरम पर है। 3 जनवरी से शुरू हुआ यह श्रद्धा और आस्था का महासंगम 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु पुण्य लाभ के लिए त्रिवेणी तट पर पहुंच...

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Magh Mela 2026 : संगम की पवित्र रेती पर माघ मेले की आध्यात्मिक छटा इन दिनों चरम पर है। 3 जनवरी से शुरू हुआ यह श्रद्धा और आस्था का महासंगम 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु पुण्य लाभ के लिए त्रिवेणी तट पर पहुंच रहे हैं। हालांकि, माघ मेले की यात्रा जहां युवाओं के लिए भी थकाऊ साबित होती है, वहीं बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रेतीले रास्तों पर लंबी दूरी तय करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता।

इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज मेला प्रशासन ने इस बार विशेष रूप से संवेदनशील और सुव्यवस्थित इंतजाम किए हैं, ताकि उम्र या शारीरिक स्थिति किसी के लिए भी संगम स्नान में बाधा न बने। प्रशासन का उद्देश्य साफ है—हर श्रद्धालु को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक तरीके से संगम तक पहुंचाना।

मेले के विशाल क्षेत्रफल को देखते हुए परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ किया गया है। संगम मार्गों पर बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए निशुल्क ई-रिक्शा और बैटरी चालित वाहनों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जो लगातार सेवाएं दे रहे हैं। ये वाहन पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ रेतीली जमीन पर भी आसानी से चलने में सक्षम हैं। इसके अलावा, बड़े हनुमान मंदिर और अक्षय वट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट सेवा भी शुरू की गई है, जिससे चलने-फिरने में असमर्थ श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है।

शहर के विभिन्न हिस्सों से मेला क्षेत्र तक पहुंचने के लिए वातानुकूलित शटल ई-बसों का संचालन भी किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी का सफर काफी आरामदेह हो गया है। यह सुविधा खासतौर पर उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए मददगार साबित हो रही है, जो भीड़ और थकान से बचना चाहते हैं।

सिर्फ मेला क्षेत्र ही नहीं, बल्कि रेलवे स्टेशनों पर भी बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सहायता व्यवस्था की गई है। स्टेशन परिसर में हेल्प डेस्क, व्हीलचेयर और बैटरी चालित वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि ट्रेन से उतरते ही श्रद्धालुओं को तुरंत सहायता मिल सके और वे खुद को असहज महसूस न करें। प्रशासन की कोशिश है कि स्टेशन से लेकर संगम तट तक हर कदम पर सरकारी सहयोग श्रद्धालुओं के साथ रहे।

सुखद और सुरक्षित यात्रा के लिए रखें ये जरूरी बातें
इन सुविधाओं का बेहतर लाभ उठाने के लिए कुछ सावधानियां अपनाना भी जरूरी है। यदि श्रद्धालु किसी निजी शिविर या कैंप में ठहरे हुए हैं, तो अपनी आवश्यकताओं की जानकारी पहले से आयोजकों को दे दें, ताकि वे प्रशासन से समन्वय कर उचित व्यवस्था कर सकें। मेला क्षेत्र से जुड़ी सटीक जानकारी, रूट और सुविधाओं के लिए ‘मेला सेवा ऐप’ या आधिकारिक वेबसाइट Utsav.gov.in का उपयोग किया जा सकता है।

प्रशासन की सलाह है कि बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालु अधिक भीड़ वाले प्रमुख स्नान पर्वों के बजाय सामान्य दिनों या अपेक्षाकृत शांत समय में स्नान की योजना बनाएं। इन छोटी-छोटी सावधानियों और प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के चलते अब संगम की यात्रा पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, सरल और सुखद हो गई है।

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