Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 Jan, 2026 08:55 AM

इस वर्ष का माघ मेला आध्यात्मिक वैभव और सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा संगम बनने जा रहा है। संगम की रेती पर लगने वाला यह मेला इस बार अपनी पुरानी सीमाओं को लांघकर एक नया इतिहास रचने को तैयार है।
Magh Mela 2026 Prayagraj : इस वर्ष का माघ मेला आध्यात्मिक वैभव और सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा संगम बनने जा रहा है। संगम की रेती पर लगने वाला यह मेला इस बार अपनी पुरानी सीमाओं को लांघकर एक नया इतिहास रचने को तैयार है। विशेष रूप से मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी के पर्वों पर यहां का दृश्य किसी लघु महाकुंभ जैसा प्रतीत होगा। माघ मेला 2026 न केवल आस्था का संगम होगा, बल्कि यह आने वाले महाकुंभ 2028 की एक भव्य रिहर्सल के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रयागराज की पवित्र त्रिवेणी की रेती पर इस बार वैष्णव अखाड़ों का जो स्वरूप दिखेगा, वह एक नई परंपरा की शुरुआत करने जा रहा है।
वैष्णव अखाड़ों का शाही वैभव
माघ मेले के इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है जब वैष्णव अखाड़े इतनी विशाल भव्यता के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। अखाड़ों के संतों का आगमन, उनके शिविरों की सजावट और शाही अंदाज़ में होने वाला स्नान इस मेले के आकर्षण का केंद्र होगा। यह न केवल श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सौभाग्य होगा, बल्कि सनातन धर्म की सैन्य और आध्यात्मिक शक्ति का प्रदर्शन भी होगा।
मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी पर मिनी महाकुंभ
प्रशासन और मेला प्राधिकरण इस बार मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी को विशेष रूप से केंद्र में रख रहे हैं।
मौनी अमावस्या
इस दिन करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जहां अखाड़ों की पेशवाई और संतों का सानिध्य मेले को महाकुंभ जैसा विस्तार देगा।
वसंत पंचमी
ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती के इस पर्व पर वैष्णव परंपरा के अनुसार भव्य आयोजन किए जाएंगे, जो प्रयागराज की सांस्कृतिक पहचान को और गहरा करेंगे।
नई परंपरा का आगाज़
अखाड़ों की सक्रिय भागीदारी से माघ मेले के स्वरूप में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब यह केवल कल्पवासियों तक सीमित न रहकर, एक व्यापक वैश्विक आध्यात्मिक उत्सव का रूप ले रहा है। संतों की छावनियां, प्रवचन, और भंडारों का आयोजन उसी स्तर पर किया जा रहा है जैसा आमतौर पर केवल कुंभ या अर्धकुंभ के दौरान देखा जाता है।
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