Magh Mela Kashi 2026 : माघ मेले में काशी के 84 घाट अलर्ट पर, रेड–येलो–ग्रीन जोन में बंटी सुरक्षा

Edited By Updated: 09 Jan, 2026 09:45 AM

magh mela kashi 2026

Magh Mela Kashi 2026 : माघ मेले की शुरुआत होते ही काशी के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस बार प्रशासन ने काशी के कुल 84 घाटों को संवेदनशीलता के आधार पर तीन अलग-अलग जोन में विभाजित किया है। इनमें सबसे अधिक जोखिम वाले...

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Magh Mela Kashi 2026 : माघ मेले की शुरुआत होते ही काशी के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस बार प्रशासन ने काशी के कुल 84 घाटों को संवेदनशीलता के आधार पर तीन अलग-अलग जोन में विभाजित किया है। इनमें सबसे अधिक जोखिम वाले रेड जोन में 13 घाट रखे गए हैं, जहां अक्सर अचानक भीड़ बढ़ने और स्नान के दौरान डूबने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे घाटों पर एहतियातन जल पुलिस और एनडीआरएफ के प्रशिक्षित गोताखोर तैनात किए गए हैं।

माघ मेला और कुंभ के बाद पलट प्रवाह को देखते हुए रेड जोन के घाटों पर स्नान करना खासा खतरनाक माना जा रहा है। इस श्रेणी में दशाश्वमेध, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, प्रयाग, शीतला, अहिल्याबाई, मान मंदिर, त्रिपुरा भैरवी, ललित, मीर, राज, तुलसी, अस्सी और रानी घाट शामिल हैं। वहीं, यलो जोन में 14 घाटों को रखा गया है, जहां जोखिम अपेक्षाकृत कम है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।

माघ मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी तक कुल 44 दिनों तक चलेगा। इस दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी में गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। समस्या यह है कि कई खतरनाक घाटों पर चेतावनी संकेत बेहद सीमित हैं, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को यह अंदाजा नहीं हो पाता कि कौन सा घाट सुरक्षित है। कई बार नाविकों के कहने पर लोग सीधे घाट की सीढ़ियों से पानी में उतर जाते हैं, जबकि कुछ कदम आगे बढ़ते ही गंगा की गहराई अचानक 12 से 15 फीट तक हो जाती है। तैरना न जानने वाले लोग गहराई में जाते ही डूबने लगते हैं। इसके अलावा कुछ घाटों पर गुफानुमा संरचनाएं भी हैं, जिनमें फंसने पर बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

जल पुलिस के अनुसार, पिछले वर्ष घाटों पर डूबने से 40 लोगों की जान गई थी, जबकि 154 लोगों को समय रहते बचा लिया गया। सबसे अधिक हादसे तुलसी घाट पर हुए थे और अधिकतर पीड़ितों को तैराकी नहीं आती थी।

दशाश्वमेध घाट को छोड़ दिया जाए तो तुलसी घाट से नमो घाट तक अधिकांश स्थानों पर जल पुलिस की स्थायी पिकेट या ड्यूटी प्वाइंट नहीं है। कई घाट पहले से ही हादसों के लिहाज से संवेदनशील बन चुके हैं, लेकिन वहां चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा संकेत लगभग न के बराबर हैं। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस का थाना है, जहां से मोटरबोट के जरिए नियमित गश्त की जाती है।

आने वाले 44 दिनों में गंगा स्नान करने वालों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। प्रयागराज के बाद काशी श्रद्धालुओं का बड़ा केंद्र बन जाता है। प्रशासन और पुलिस सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन घाटों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई देती है। अस्सी से नमो घाट के बीच कुछ ही स्थानों पर चेंजिंग रूम बने हैं, जबकि कई घाटों पर मोबाइल शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं।

विशेष स्नान पर्वों जैसे मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के दौरान भीड़ और अधिक बढ़ेगी। इसके बावजूद खतरनाक घाटों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है। न तो पर्याप्त चेतावनी व्यवस्था है, न ही पानी में उतरने वालों को रोकने या नियंत्रित करने की ठोस व्यवस्था दिखाई देती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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