Mangla gauri vrat: व्रत कथा के साथ पढ़ें महत्वपूर्ण जानकारी

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 19 Jul, 2022 07:07 AM

mangla gauri vrat katha

श्रावण मास में जितना महत्व सोमवार का होता है उतना ही मंगलवार का भी होता है। यह पूरा महीना भगवान भोले नाथ को अतिप्रिय है। जिस प्रकार श्रावण मास के सोमवार में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए

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Mangla gauri vrat 2022: श्रावण मास में जितना महत्व सोमवार का होता है उतना ही मंगलवार का भी होता है। यह पूरा महीना भगवान भोले नाथ को अतिप्रिय है। जिस प्रकार श्रावण मास के सोमवार में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है, उसी प्रकार श्रावण मास के मंगलवार के दिन माता गौरी के व्रत का विधान है।

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Mangla gauri vrat katha: मंगलागौरी व्रत कथा- एक पौराणिक कथा अनुसार, एक समय कुरु देश में श्रुतिकीर्ति नामक एक बहुत ही प्रसिद्ध राजा रहता था। वह बहुत ही दयावान, दयालु और अनेक कलाओं में निपुण था। उस के राज्य में समस्त प्रजा बहुत सुखी थी परन्तु राजा बहुत ही दुखी और परेशान था क्योंकि उसके कोई पुत्र संतान नहीं था। पुत्र प्राप्ति के लिए राजा ने कई तप-जप और अनुष्ठान किए, जिस से प्रसन्न हो कर भगवान शिव ने राजा को एक पुत्र वरदान स्वरूप दिया लेकिन उस का जन्म के साथ उसके मरण की भी भविष्यवाणी कर दी की तुम्हारा पुत्र सोलह वर्ष तक ही जीवित रहेगा।

भगवान शिव के आशीर्वाद से समयानुसार रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिस का नाम चिरायु रखा गया। जैसे-जैसे चिरायु बड़ा होने लगा राजा और रानी को अपने पुत्र की अकाल मृत्यु की चिंता सताने लगी। राजा ने अपने राज्य के विद्वानों को बुला कर अपनी चिंता बताई। विद्वानों के सुझाव अनुसार राजा ने चिरायु का विवाह एक ऐसी कन्या से कर दिया जो मंगला गौरी का व्रत करती थी। मंगला गौरी के व्रत के आशीर्वाद से उस कन्या का सौभग्य अखंड हुआ और लम्बी आयु वाले वर की प्राप्ति हुई। इस प्रकार राजा ने अपने पुत्र के जीवन की रक्षा की।

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Mangla gauri vrat vidhi: मंगलागौरी व्रत विधि- व्रत वाले दिन व्रती को नित्य कर्मों से निर्वृत होकर साफ़ वस्त्र धारण करने चाहिए। फिर मंगला गौरी की तस्वीर को एक चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद आटे का चौमुखी दीया जलाएं। गौरी पूजन में 16 वस्तुओं का बहुत महत्व है जैसे 16 श्रंगार की सामग्री, 16 तरह के फूल, फ़ल, पान-सुपारी, लौंग आदि। फिर माता के मंत्र “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||” का जाप करना चाहिए।

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Significance of Mangala Gauri Vrat: व्रत का महत्व- माता गौरी व्रत से प्रसन्न हो कर कुंवारी कन्याओं के विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करती है, वैवाहिक जीवन में खुशहाली, पुत्र प्राप्ति, पति/पुत्र की लम्बी आयु व अन्य सुखों से परिपूर्ण करती हैं।

आचार्य लोकेश धमीजा
वेबसाइट –www.goas.org.in

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