Edited By Sarita Thapa,Updated: 05 Apr, 2026 02:08 PM

ज्योतिष और अंकशास्त्र के अनुसार, कुछ विशेष अंकों का प्रभाव व्यक्ति के व्यक्तित्व को बेहद प्रभावशाली और रहस्यमयी बना देता है।
Numerology And Narasimha : ज्योतिष और अंकशास्त्र के अनुसार, कुछ विशेष अंकों का प्रभाव व्यक्ति के व्यक्तित्व को बेहद प्रभावशाली और रहस्यमयी बना देता है। भगवान नरसिंह, जो भगवान विष्णु के सबसे शक्तिशाली और उग्र अवतार माने जाते हैं, उनका स्वभाव क्रोध और करुणा का एक अद्भुत मिश्रण है। भगवान नरसिंह, जो क्रोध' और प्रेम के सबसे अद्भुत प्रतीक हैं, उनकी विशेष ऊर्जा कुछ खास तारीखों पर जन्मे लोगों में कूट-कूट कर भरी होती है। ये लोग बाहर से चट्टान की तरह सख्त, लेकिन भीतर से मोम की तरह कोमल होते हैं। तो आइए जानते हैं इस दिलचस्प मेल वाले लोगों बारे में-
किन तारीखों पर होता है 'नरसिंह ऊर्जा' का प्रभाव?
अंक ज्योतिष की गणना के अनुसार, जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है (मूलांक 9), उनमें भगवान नरसिंह की ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय होती है। इसके अलावा, मूलांक 1 (1, 10, 19, 28) और मूलांक 8 (8, 17, 26) वाले जातकों में भी इस ऊर्जा का विशेष अंश देखा जाता है।
इन जातकों के व्यक्तित्व की 3 बड़ी विशेषताएं
अन्याय के विरुद्ध सिंह जैसी गर्जना
इन तारीखों पर जन्मे लोग स्वभाव से बेहद न्यायप्रिय होते हैं। यदि उनके सामने कुछ गलत हो रहा हो, तो उनका क्रोध भगवान नरसिंह की तरह अनियंत्रित हो जाता है। वे किसी की गुलामी पसंद नहीं करते और अपने स्वाभिमान के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
भीतर प्रेम का अथाह सागर
जैसे भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का संहार करने के बाद भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठाकर अपार प्रेम लुटाया था, ठीक वैसे ही इन तारीखों वाले लोग होते हैं। अपने परिवार, मित्रों और कमजोर लोगों के लिए इनके दिल में अथाह करुणा होती है। ये लोग दूसरों की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटते।

स्पष्टवादी और निडर स्वभाव
इनमें छल-कपट नहीं होता। जो दिल में है, वही जुबान पर होता है। इनकी स्पष्टवादिता कई बार लोगों को 'कड़वी' लग सकती है, लेकिन ये लोग पीठ पीछे वार करने के बजाय सामने से लड़ना पसंद करते हैं।
नरसिंह ऊर्जा को कैसे करें संतुलित?
चूंकि इन जातकों में ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा होता है, इसलिए कभी-कभी इनका क्रोध इनके विवेक पर हावी हो सकता है। इसे संतुलित करने के लिए कुछ उपाय लाभकारी हैं।
नियमित ध्यान : प्रतिदिन 10 मिनट का ध्यान ऊर्जा को सही दिशा देता है।
नरसिंह मंत्र का जाप: "ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं..." मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है।
अनुशासन: अपनी ऊर्जा को किसी रचनात्मक कार्य या खेल में लगाएं।

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