Edited By Sarita Thapa,Updated: 16 Jan, 2026 08:57 AM

प्रयागराज की पावन त्रिवेणी में माघ मेले की रौनक अपने चरम पर है। कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर डुबकी लगा रहे हैं।
Prayagraj Magh Mela 2026 : प्रयागराज की पावन त्रिवेणी में माघ मेले की रौनक अपने चरम पर है। कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर डुबकी लगा रहे हैं। इस वर्ष का मेला न केवल मिनी कुंभ के रूप में अपनी चमक बिखेर रहा है, बल्कि संतों के अनूठे संकल्पों ने इसे चर्चा का केंद्र बना दिया है।
5.51 करोड़ रुद्राक्षों से बना दिव्य शिवलिंग
इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण अमेठी के परमहंस पीठाधीश्वर शिव योगी मौनी महाराज (मौनी बाबा) का शिविर है। उन्होंने इस बार 5 करोड़ 51 लाख रुद्राक्षों से 11 फीट ऊंचा एक भव्य शिवलिंग स्थापित किया है। इसके साथ ही शिविर के चारों ओर 11,000 त्रिशूल लगाए गए हैं, जो राष्ट्र रक्षा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हैं।
आस्था के साथ सामाजिक और राष्ट्रहित का संदेश
मौनी बाबा का यह अनुष्ठान केवल धार्मिक नहीं है। उन्होंने इस मंच से कई महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिए हैं। पर्यावरण वाले बाबा के रूप में प्रसिद्ध संतों ने पेड़ लगाने और गंगा को स्वच्छ रखने का आह्वान किया है। शिविर के माध्यम से समाज में बेटियों को बचाने और भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों को खत्म करने का संकल्प दोहराया जा रहा है। बाबा ने काशी और मथुरा में भव्य मंदिर निर्माण तथा आतंकवाद के नाश के लिए विशेष साधना शुरू की है।
संगम तट पर मिनी कुंभ का नजारा
मेला प्रशासन के अनुसार, मकर संक्रांति और पौष पूर्णिमा के स्नान पर्वों पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान किया है। पूरे मेला क्षेत्र को 7 सेक्टरों में बांटा गया है, जहां करीब 5000 से अधिक संस्थाएं और साधु-संत अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कल्पवास: संयम और अनुशासन की परंपरा
हजारों कल्पवासी संगम की रेती पर अपनी झोपड़ियां बनाकर एक महीने का कठिन व्रत कर रहे हैं। इस बार किन्नर अखाड़ा के सदस्य भी बड़ी संख्या में कल्पवास और समाज कल्याण की दुआएं कर रहे हैं, जो भारतीय संस्कृति की समावेशी तस्वीर पेश करता है।
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