Premanand Maharaj on Kalyug: कलियुग को सबसे श्रेष्ठ युग क्यों बताते हैं प्रेमानंद महाराज? जानिए कैसे कलियुग में ही संभव है सतयुग का सुख

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 07:18 PM

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Premanand Maharaj on Kalyug: वृंदावन के प्रसिद्ध संत और राधारानी के अनन्य भक्त प्रेमानंद महाराज जी अपने आध्यात्मिक विचारों और सरल जीवन-दर्शन के लिए देश-विदेश में जाने जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनके प्रवचनों के वीडियो आए दिन वायरल होते रहते हैं,...

Premanand Maharaj on Kalyug: वृंदावन के प्रसिद्ध संत और राधारानी के अनन्य भक्त प्रेमानंद महाराज जी अपने आध्यात्मिक विचारों और सरल जीवन-दर्शन के लिए देश-विदेश में जाने जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनके प्रवचनों के वीडियो आए दिन वायरल होते रहते हैं, जिनमें वे कलियुग, भक्ति, आचरण और जीवन के गूढ़ सत्य को सरल शब्दों में समझाते हैं। हाल ही में वायरल हो रहे एक वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने कलियुग को लेकर एक ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जो सामान्य धारणा से बिल्कुल अलग है। जहां कलियुग को पाप और पतन का युग माना जाता है, वहीं महाराज जी इसे सबसे सम्माननीय युग बताते हैं।

कैसे कलियुग सबसे सम्माननीय युग है?
प्रेमानंद महाराज स्पष्ट करते हैं कि युग समय से नहीं, बल्कि मनुष्य के आचरण से तय होता है। उनका कहना है कि जब इंसान पाप करता है, तब हर युग कलियुग बन जाता है और जब भगवान का भजन करता है, तब वही समय सतयुग बन जाता है। महाराज जी के अनुसार, कलियुग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सबसे सरल है। वे कहते हैं कि “जो सिद्धि पहले युगों में हजारों वर्षों की तपस्या से मिलती थी, वही कलियुग में केवल 24 घंटे के नाम कीर्तन से मिल सकती है।”

‘इतना पाप कलियुग में ही क्यों?’— सवाल पर क्या बोले महाराज?

प्रवचन के दौरान एक व्यक्ति ने सवाल किया— “किसी भी युग में इतना पाप नहीं होता था जितना कलियुग में हो रहा है, ऐसे में हम कैसे बचे?”

इस पर प्रेमानंद महाराज ने प्रश्नकर्ता से ही सवाल करते हुए कहा— “क्या तुम उस युग में थे, जिसकी बात कर रहे हो?”

उन्होंने त्रेता युग का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय ऋषियों को राक्षस खा जाते थे और उनकी हड्डियों के ढेर लगे रहते थे। भगवान श्रीराम के वनवास काल का उल्लेख करते हुए महाराज जी बताते हैं कि उस युग में भी अत्याचार और अमानवीय घटनाएं आम थीं।

महाराज जी कहते हैं— “कलियुग में आज तक किसी ने यह नहीं सुना कि किसी महात्मा को जिंदा आदमी खा गया हो।”

क्यों कहा— ‘कलियुग के समान कोई युग नहीं’

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, कलियुग इसलिए महान है क्योंकि इसमें भगवान की कृपा सबसे शीघ्र प्राप्त होती है।

वे कहते हैं— “जय हो कलियुग की। बच्चा, तुम इसे समझ नहीं पा रहे। कलियुग के समान कोई युग नहीं है।”

उनका मानना है कि कलियुग में यदि व्यक्ति अपने आचरण को शुद्ध रखे, तो यह युग उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

कलियुग से बचने के लिए बताए 5 महत्त्वपूर्ण नियम
प्रेमानंद महाराज जी ने ऐसे पांच कर्म बताए, जिनसे दूरी बनाकर रखने पर कलियुग का प्रभाव समाप्त हो जाता है—

शराब और नशे का सेवन न करें।

पराई माताओं-बहनों पर बुरी नजर न डालें।

जुआ न खेलें।

मांसाहार और हिंसा से दूर रहें।

चोरी न करें।

महाराज जी कहते हैं— “इन पांच चीजों से दूर रहोगे तो कलियुग तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा, लेकिन इन्हें अपनाओगे तो कलियुग मटियामेट कर देगा।”

कलियुग में रहते हुए सतयुग का आनंद कैसे लें?
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, नाम-स्मरण, भजन, सदाचार और संयमित जीवन अपनाकर कोई भी व्यक्ति कलियुग में रहते हुए सतयुग का अनुभव कर सकता है। बुरे आचरण से दूरी बनाना ही सच्चा धर्म है।

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