Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 Jan, 2026 02:15 PM

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब अपने लक्ष्यों को पाना चाहते हैं, लेकिन अक्सर हमारे और हमारी सफलता के बीच एक सबसे बड़ी दीवार खड़ी हो जाती है- वह है आलस।
Premanand Maharaj teachings on laziness : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब अपने लक्ष्यों को पाना चाहते हैं, लेकिन अक्सर हमारे और हमारी सफलता के बीच एक सबसे बड़ी दीवार खड़ी हो जाती है- वह है आलस। सुबह अलार्म बजने पर उसे स्नूज़ करना हो या भक्ति के समय आने वाली नींद, यह सुस्ती हमारे संकल्प को धीरे-धीरे खत्म कर देती है। वृंदावन के विरक्त संत प्रेमानंद जी महाराज, जो अपने बेबाक और सत्य वचनों के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने आलस को मात देने का एक ऐसा कड़ा लेकिन सटीक रास्ता बताया है जो आपकी दिनचर्या बदल सकता है। उनका कहना है कि यदि आप अपने मन के लाड़-प्यार में फंसे रहे, तो कभी उन्नति नहीं कर पाएंगे। महाराज जी के अनुसार, जब सुबह मन रजाई में दुबकने को कहे या साधना के समय झपकी आने लगे, तो उस वक्त केवल एक ही मंत्र काम आता है- अपने ऊपर कठोर शासन। तो आइए जानते हैं, प्रेमानंद महाराज के वे क्रांतिकारी विचार जिन्होंने हज़ारों युवाओं को बिस्तर छोड़कर कर्म पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।
रजाई फेंको और खड़े हो जाओ
महाराज जी कहते हैं कि जब मन कहे कि थोड़ा और सो लेते हैं, या शरीर रजाई की गर्माहट छोड़ने को तैयार न हो, तो उसी क्षण रजाई को झटक कर फेंक दें। मन के साथ लाड़-प्यार करना बंद करें। आलस को हराने का एकमात्र तरीका है- त्वरित निर्णय। जैसे ही बिस्तर छोड़ने का विचार आए, बिना एक सेकंड गंवाए खड़े हो जाएं।
भक्ति में झपकी आए तो क्या करें ?
यदि बैठकर भजन करते समय झपकी आ रही है, तो तुरंत खड़े हो जाएं और टहलते हुए भगवान का नाम लें। आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारें। यह शरीर को सचेत करने का सबसे आसान तरीका है। महाराज जी मजाकिया लेकिन गंभीर लहजे में कहते हैं कि कल्पना करो अगर अभी यमराज सामने खड़े हों, तो क्या नींद आएगी? मृत्यु का स्मरण आलस को जड़ से खत्म कर देता है।

भोजन पर नियंत्रण
आलस का एक बड़ा कारण हमारा खान-पान भी है। महाराज जी के अनुसार, बहुत अधिक या बहुत गरिष्ठ (भारी) भोजन करने से शरीर भारी हो जाता है और बुद्धि सुस्त। यदि आप कर्मठ बनना चाहते हैं, तो अपनी भूख से थोड़ा कम खाएं और शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करें।
मन को गुलाम बनाएं, मालिक नहीं
प्रेमानंद जी कहते हैं कि हम अपने मन के कहने पर चलते हैं, इसलिए आलसी हैं। जिस दिन आप मन को अपने आदेश पर चलाना शुरू कर देंगे, उस दिन आलस आपको छू भी नहीं पाएगा। जब मन कहे 'कल करेंगे', तो आप उसे डांटकर कहें- नहीं, अभी करेंगे।
लक्ष्य के प्रति दृढ़ता
बिना लक्ष्य के मनुष्य आलसी हो जाता है। चाहे वह आध्यात्मिक लक्ष्य हो या सांसारिक, आपके पास सुबह उठने का एक ठोस कारण होना चाहिए। जब जीवन में सेवा और सुमिरन का लक्ष्य स्पष्ट होता है, तो नींद और आलस खुद-ब-खुद पीछे छूट जाते हैं।

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