Ram Lalla Pratishtha Diwas 2026 : 22 जनवरी 2026 को रामलला प्रतिष्ठा दिवस, सूर्य के शुभ योग में गूंजेगा जय श्रीराम

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 03:16 PM

ram lalla pratishtha diwas 2026

Ram Lalla Pratishtha Diwas 2026 : अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ न केवल एक धार्मिक उत्सव है बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक भी बन चुका है। 22 जनवरी 2026 को रामलला प्रतिष्ठा दिवस की दूसरी वर्षगांठ...

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Ram Lalla Pratishtha Diwas 2026 : अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ न केवल एक धार्मिक उत्सव है बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक भी बन चुका है। 22 जनवरी 2026 को रामलला प्रतिष्ठा दिवस की दूसरी वर्षगांठ मनाई जाएगी। इस वर्ष यह दिन न केवल अपनी ऐतिहासिक महत्ता के कारण, बल्कि ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण भी अत्यंत शुभ होने वाला है। आइए विस्तार से जानते हैं कि 22 जनवरी 2026 को ग्रहों की स्थिति क्या होगी और इस दिन का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व क्या है।

रामलला प्राणप्रतिष्ठा मुहूर्त
दिनांक- गुरुवार, 22 जनवरी 2026
तिथि- पौष शुक्ल पक्ष (जनवरी 2026)

संभावित मुहूर्त
07:14 ए.एम से 08:33 ए.एम
11:13 ए.एम से 12:33 पी.एम
12:33 पी.एम से 01:53 पी.एम


राम मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि पर एक प्राचीन मंदिर सदियों पहले विद्यमान था, जिसे 16वीं शताब्दी में विदेशी आक्रमण के दौरान ध्वस्त कर दिया गया। इस घटना के बाद राम जन्मभूमि को लेकर एक लंबा और जटिल विवाद शुरू हुआ, जो लगभग पाँच शताब्दियों तक भारतीय समाज, आस्था और न्याय व्यवस्था के केंद्र में बना रहा। लंबे समय तक चले जनआंदोलन, सामाजिक संघर्ष और कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार भगवान श्री राम की जन्मस्थली पर भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका। यह क्षण आधुनिक भारत के इतिहास में केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आस्था, धैर्य और न्याय की ऐतिहासिक विजय का प्रतीक बन गया।

रामलला प्रतिष्ठा दिवस का आध्यात्मिक महत्व
रामलला प्रतिष्ठा दिवस को श्रद्धालु एक सामान्य तिथि नहीं, बल्कि दिवाली के समान एक महान आध्यात्मिक उत्सव के रूप में मनाते हैं। इस दिन भक्तगण प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन होकर भजन-कीर्तन, रामकथा पाठ, विशेष पूजा-अर्चना और सामूहिक आयोजनों में भाग लेते हैं। घरों और मंदिरों को दीपों से सजाया जाता है तथा दान-पुण्य और अन्नदान जैसे पुण्य कर्म किए जाते हैं। यह पावन दिवस माघ मास में आता है, जिसे सनातन परंपरा में तप, साधना और पुण्य का विशेष काल माना गया है। इसी समय सूर्यदेव उत्तरायण रहते हैं, जो ऊर्जा, शुभता और सकारात्मक परिवर्तन के प्रतीक हैं। सूर्य की यह अनुकूल स्थिति आत्मबल, तेज और धर्मभाव को प्रबल करती है। यही कारण है कि रामलला प्रतिष्ठा दिवस को एक विशेष आध्यात्मिक योग के रूप में देखा जाता है, जो समाज में धर्म, सद्भाव और सकारात्मक चेतना का संचार करता है।

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