Sheetala Saptami: पढ़ें मां शीतला की कथा, रोगों को कहें Bye-Bye

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 14 Mar, 2023 10:22 AM

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होली से सातवें और आठवें दिन मां शीतला की पूजा होती है। 14 मार्च, मंगलवार को शीतला सप्तमी और 15 मार्च बुधवार को शीतला अष्टमी तिथि है। कुछ समुदाय ऐसे भी हैं, जो होली के बाद आने वाले पहले सोमवार या मंगलवार को मां शीतला की

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Sheetala Saptami 2023: होली से सातवें और आठवें दिन मां शीतला की पूजा होती है। 14 मार्च, मंगलवार को शीतला सप्तमी और 15 मार्च बुधवार को शीतला अष्टमी तिथि है। कुछ समुदाय ऐसे भी हैं, जो होली के बाद आने वाले पहले सोमवार या मंगलवार को मां शीतला की उपासना करते हैं। इनकी कृपा से मौसम परिवर्तन पर जो रोग होते हैं जैसे चेचक, ज्वर, फोड़े-फुंसियां आदि से बचाव रहता है। ये अपने भक्तों की सेहत की रक्षा करती हैं। इन्हें बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।

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Sheetala Ashtami Katha शीतला माता की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता शीतला की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा ने की थी। देव लोक से शीतला माता धरती पर अपने साथ भगवान शिव के पसीने से बने ज्बरा सुर को अपना साथी मान कर लाई थी तब उनके पास दाल के दाने भी थे।

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शीतला माता के हाथ में झाड़ू होने पर उस समय के राजा विराट ने माता शीतला को अपने राज्य में रहने के लिए जब कोई स्थान नहीं दिया, तब माता शीतला अत्यंत क्रोधित हो गई, उसी क्रोध की ज्वाला से राजा की प्रजा के शरीर पर लाल दाने निकल आए और लोग उसकी गर्मी से संलिप्त हो गए। 

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राजा को अपनी गलती का अहसास होने पर उसने माता शीतला से माफी मांग कर उसे उचित स्थान दे दिया। लोगों ने माता शीतला के क्रोध को शांत करने के लिए ठंडा दूध और कच्ची लस्सी चढ़ानी शुरू की, जिससे माता का क्रोध शांत हुआ तब से प्रत्येक वर्ष लोग शीतला अष्टमी पर मां का आशीर्वाद पाने के लिए ठंडे बासी भोजन का प्रसाद और व्रत करने लगे। 

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माता के दानों को मैडीकल साइंस में चेचक के दानों का नाम दिया गया। लोग माता पर चढ़ाए गए पानी से चेचक के दानों का इलाज करते हैं। मान्यता अनुसार शतलार अष्टमी के दिन व्रत रखने से शीतला देवी प्रसन्न होती हैं और परिवार में फोड़े, नेत्रों के समस्त रोग, शीतला की फुंसियों के चिन्ह तथा शीतलाजनित दोष दूर हो जाते हैं।

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