Edited By Prachi Sharma,Updated: 10 Jan, 2026 02:42 PM

Swami Vivekananda Quotes : स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के उन महान आध्यात्मिक गुरुओं और दार्शनिकों में से एक हैं, जिनके विचार समय की सीमाओं को लांघकर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वे सौ साल पहले थे। युवाओं के लिए वे केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व...
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Swami Vivekananda Quotes : स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के उन महान आध्यात्मिक गुरुओं और दार्शनिकों में से एक हैं, जिनके विचार समय की सीमाओं को लांघकर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वे सौ साल पहले थे। युवाओं के लिए वे केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं बल्कि एक ऊर्जा पुंज हैं जो अंधकार में प्रकाश का मार्ग दिखाते हैं। विवेकानंद जी का मानना था कि युवा ही राष्ट्र की असली शक्ति हैं। उन्होंने युवाओं को सफलता के जो मंत्र दिए, वे केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए नहीं, बल्कि भौतिक जगत में शिखर तक पहुचने के लिए भी अचूक हैं।
एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति समर्पण
विवेकानंद जी का सबसे प्रसिद्ध सूत्र है:
एक विचार लो। उस विचार को अपना जीवन बना लो उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो और बाकी सभी विचारों को किनारे कर दो। यही सफलता का मार्ग है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ध्यान का भटकाव है। विवेकानंद सिखाते हैं कि यदि हम अपनी पूरी ऊर्जा को एक बिंदु पर केंद्रित कर दें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। सफलता की पहली शर्त स्पष्टता और समर्पण है।
निडरता:
विवेकानंद जी अक्सर कहते थे, अभय बनो ! उनके अनुसार, डर ही दुनिया का सबसे बड़ा पाप है। वे मानते थे कि भय हमारी क्षमताओं को सीमित कर देता है। उन्होंने सिखाया कि जब हम खुद पर विश्वास करना शुरू करते हैं और यह महसूस करते हैं कि हमारे भीतर अदम्य शक्ति का भंडार है, तो डर स्वतः ही गायब हो जाता है। सफलता की राह में आने वाली असफलताओं से वही व्यक्ति जीत सकता है जो निडर है। उन्होंने युवाओं से कहा कि अगर तुम एक बार असफल होते हो, तो डरो मत, बल्कि उठो और दुगुनी ऊर्जा से प्रयास करो।

आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास
विवेकानंद जी का दर्शन आत्म-साक्षात्कार पर आधारित है। वे कहते थे, "जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप ईश्वर पर विश्वास नहीं कर सकते।आधुनिक युवा अक्सर बाहरी मदद या परिस्थितियों के अनुकूल होने का इंतज़ार करते हैं। विवेकानंद जी का संदेश था कि तुम अपनी किस्मत के खुद निर्माता हो। तुम्हारे भीतर वह सब कुछ है जिसकी तुम्हें ज़रूरत है। दूसरों के पीछे चलने के बजाय अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करो।
चरित्र निर्माण और नैतिकता
विवेकानंद के लिए सफलता का अर्थ केवल धन या पद प्राप्त करना नहीं था। उनके अनुसार, वास्तविक सफलता चरित्र में निहित है। उन्होंने कहा कि बुद्धिमत्ता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण पवित्रता और निस्वार्थ सेवा है। यदि कोई व्यक्ति बहुत सफल है लेकिन उसका चरित्र कमजोर है, तो वह सफलता लंबे समय तक नहीं टिकेगी। युवाओं को चाहिए कि वे अपने मूल्यों से समझौता न करें। एक महान चरित्र ही एक महान राष्ट्र और एक महान व्यक्तित्व का आधार होता है।
सेवा भाव
सफलता की राह पर चलते हुए अक्सर इंसान आत्मकेंद्रित हो जाता है। विवेकानंद जी ने सिखाया कि जो दूसरों के लिए जीता है, वही वास्तव में जीवित है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपनी शिक्षा और कौशल का उपयोग समाज के पिछड़े और जरूरतमंद लोगों के उत्थान के लिए करें। जब आप बड़े उद्देश्य के लिए काम करते हैं, तो आपकी आंतरिक शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि उनके विचारों से प्रेरित होकर अनगिनत युवाओं ने समाज सेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बनाया।
