Edited By Sarita Thapa,Updated: 07 Jan, 2026 12:14 PM

वास्तु शास्त्र और लोक मान्यताओं में घोड़े की नाल को सौभाग्य और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है। अक्सर आपने घरों के मुख्य द्वार पर काले घोड़े की नाल लगी देखी होगी। माना जाता है कि यह घर को बुरी नजर से बचाती है और नकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने से रोकती...
Vastu Horse Shoe Directions : वास्तु शास्त्र और लोक मान्यताओं में घोड़े की नाल को सौभाग्य और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है। अक्सर आपने घरों के मुख्य द्वार पर काले घोड़े की नाल लगी देखी होगी। माना जाता है कि यह घर को बुरी नजर से बचाती है और नकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने से रोकती है। हालांकि, कई लोग इसे केवल सजावट के तौर पर कहीं भी टांग देते हैं, जो कि गलत है। वास्तु के अनुसार, घोड़े की नाल का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा, सही दिन और सही आकार में लगाया जाए। तो आइए जानते हैं घोड़े की नाल लगाने के पीछे का असल कारण क्या है और वास्तु सम्मत वे कौन से नियम हैं जिन्हें जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
क्यों लगाई जाती है घोड़े की नाल?
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, घोड़े की नाल लोहे की बनी होती है और लोहा शनि देव की धातु मानी जाती है। जब घोड़ा दौड़ता है, तो उसके खुरों से निकलने वाली ऊर्जा और घर्षण से यह नाल सक्रिय हो जाती है। इसे घर पर लगाने के मुख्य कारण ये हैं।
बुरी नजर से बचाव
इसे मुख्य द्वार पर लगाने से घर को 'नजर दोष' से सुरक्षा मिलती है।
शनि दोष का निवारण
ज्योतिष के अनुसार, काले घोड़े की नाल लगाने से शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव कम होता है।
बरकत और समृद्धि
वास्तु की मानें तो यह धन के आगमन को सुगम बनाती है और घर में सुख-शांति लाती है।

घोड़े की नाल लगाने की सही दिशा और तरीका
इसे हमेशा घर के मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपर बीचों-बीच लगाना चाहिए। यदि आपका मुख्य द्वार उत्तर, उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में है, तो इसे लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि इसका खुला हिस्सा ऊपर की ओर है, तो यह सकारात्मक ऊर्जा को बटोरने का काम करता है। यदि खुला हिस्सा नीचे की ओर है, तो यह घर को सुरक्षा कवच प्रदान करता है और बुरी नजर को बाहर ही रोक देता है।
वास्तु के जरूरी नियम
दुकान से खरीदी गई नई नाल की तुलना में वह नाल ज्यादा प्रभावशाली होती है जो घोड़े के पैरों से खुद निकल गई हो या पुरानी हो। वास्तु में विशेष रूप से काले घोड़े की नाल को ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसे लगाने के लिए शनिवार का दिन सबसे उपयुक्त माना जाता है। लगाने से पहले इसे गंगाजल से शुद्ध कर लेना चाहिए।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ