वास्तु के अनुसार इस दिशा में बनवाएं घर का मंदिर

Edited By Updated: 15 May, 2019 12:02 PM

vastu tips for home temple

परिवार की सुख-शांति के लिए हर कोई भगवान से प्रार्थना करता है और उन्हें पूजता है। आस्था और विश्वास के साथ हम आपने-अपने घरों में भगवान को स्थान देते हैं

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परिवार की सुख-शांति के लिए हर कोई भगवान से प्रार्थना करता है और उन्हें पूजता है। आस्था और विश्वास के साथ हम आपने-अपने घरों में भगवान को स्थान देते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। लेकिन ऐसा माना गया है कि पूजा-पाठ करने का फल तभी मिलता है, जब वह दिल से की गई हो और साथ ही पूरे विधि-विधान के साथ की जाए तो ही उसका पूरा फल मिलता है। लेकिन क्या आपको पता है कि अगर पूजा घर को वास्तु के हिसाब से न बनाया जाए तो आपको आपकी पूजा का कोई फल नहीं मिलेगा और उल्टा आपको नुकसान हो सकता है। इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि वास्तु के उन नियमों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप पा सकते हैं अपनी पूजा का पूरा लाभ। 
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पूजा करते वक्त मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करना चाहिए। वास्तु ग्रंथों में कहा गया है कि धन प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके की गई पूजा चमत्कारिक लाभ देती है। 

देवी मां और हनुमान जी की पूजा दक्षिण दिशा में, धन की दिशा उत्तर में गणेश, लक्ष्मी जी एवं कुबेर की व उत्तर-पूर्व दिशा में शिव परिवार, राधा-कृष्ण और पूर्व दिशा में श्री राम दरबार, भगवान विष्णु की आराधना एवं सूर्य उपासना करने से परिवार में सौभाग्य की वृद्धि होती है। 
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आरोग्य प्राप्ति के लिए उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान धनवंतरि, अश्विनी कुमार एवं नदियों की आराधना करने से उत्तम स्वास्थ्य एवं सुख की प्राप्ति होती है। 

शिक्षा की दिशा दक्षिण-पश्चिम में विद्यादायिनी मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान में वृद्धि होती है। पश्चिम दिशा में गुरु, महावीर स्वामी, भगवान बुद्ध की पूजा शुभ फल प्रदान करती है। 

संबंधों और जुड़ाव की दिशा दक्षिण-पश्चिम में पूर्वजों की पूजा सुख-समृद्धि प्रदान करेगी। 

शास्त्रों के अनुसार पूजा स्थल में सुबह-शाम नियमित रूप से दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होकर परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनेगा। सात्विक रंग जैसे हल्का हरा, पीला, जामुनी या क्रीम रंग का यहां प्रयोग करने से मन को शांति मिलती है।
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वास्तु के अनुसार पूजाघर के नीचे या ऊपर शौचालय नहीं होना चाहिए और इसे हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। 

पूजाघर में महाभारत की प्रतिमाएं, प्राणी तथा पक्षियों के चित्र नहीं होने चाहिए। दिवंगतों की तस्वीरें भी यहां नहीं रखें।

पूजाघर में कोई भी खंडित तस्वीर या मूर्ति नहीं होनी चाहिए। अगर हो तो वहां से तुरंत हटा देना चाहिए। 

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