No condoms, no pills! कपल्स बिना गर्भनिरोधक गोलियों और कंडोम के बनाए संबंध, यह देश अपने लोगों को कर रहा प्रेरित

Edited By Updated: 18 Jan, 2026 04:23 PM

china is promoting relationships without condoms and contraception

दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश चीन अब एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। चीन में जन्मदर (Birth Rate) इतनी गिर गई है कि सरकार अब युवाओं को बिना कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों (Contraceptives) के संबंध बनाने के लिए...

Falling Birth Rate Crisis in China: दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश चीन अब एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। चीन में जन्मदर (Birth Rate) इतनी गिर गई है कि सरकार अब युवाओं को बिना कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों (Contraceptives) के संबंध बनाने के लिए प्रेरित कर रही है। ड्रैगन का लक्ष्य साफ है—कैसे भी करके देश में बच्चों की संख्या बढ़ाई जाए।

कंडोम पर भारी टैक्स की मार: अब खरीदना होगा महंगा

चीनी सरकार ने 1 जनवरी 2026 से गर्भनिरोधक उत्पादों पर 13% वैट (VAT) लागू कर दिया है। सरकार का मानना है कि इन उत्पादों को महंगा करने से लोग इनका इस्तेमाल कम करेंगे। टैक्स के बाद चीन में एक पैकेट कंडोम की कीमत करीब 630 भारतीय रुपये (50 युआन) हो गई है। एक महीने की गर्भनिरोधक गोलियों का औसत खर्च अब बढ़कर 1150 भारतीय रुपये (130 युआन) तक पहुंच गया है। एक तरफ जहां प्रोटेक्शन महंगा किया गया है वहीं चाइल्ड केयर और शादी से जुड़ी सेवाओं को टैक्स-फ्री (Duty-Free) रखा गया है।

आखिर चीन को क्यों लेना पड़ा यह चौंकाने वाला फैसला?

रिपोर्ट के मुताबिक चीन की प्रजनन दर गिरकर 1.0 बच्चे प्रति महिला तक पहुंच गई है। सरकार इसे दोगुना करना चाहती है।

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जन्मदर गिरने का सफर

1960 का दशक प्रजनन दर 7.0 से अधिक थी। एक बच्चा नीति ने आबादी तो कम की लेकिन 2015 तक दर 1.5 पर आ गई। 2021 में 'तीन बच्चा नीति' लाने के बावजूद लोग बच्चे पैदा करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। 2024 में यह दर गिरकर ऐतिहासिक रूप से 1.0 रह गई है।

बच्चे पैदा करने पर 'इनाम' और विशेष सुविधाएं

चीन सिर्फ टैक्स लगाकर नहीं रुक रहा बल्कि वह उन परिवारों पर पैसा भी बरसा रहा है जो बच्चे पैदा कर रहे हैं। चीन ने नेशनल चाइल्ड केयर प्रोग्राम के लिए 90 अरब युआन (करीब 12.7 अरब डॉलर) आवंटित किए हैं। 3 साल से छोटे हर बच्चे के लिए परिवार को एक बार में 3,600 युआन (करीब 45,000 भारतीय रुपये) दिए जा रहे हैं। बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और काम करने वाले युवाओं की कमी (Labor Shortage) को दूर करना।

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