Edited By Anu Malhotra,Updated: 12 Oct, 2026 02:31 PM

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, अल नीनो की वजह से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम में असामान्य और चरम बदलाव देखे गए हैं - जहां चिली के अटाकामा रेगिस्तान में फूल खिले, वहीं जापान की राजधानी टोक्यो में लगातार 35 दिनों तक बारिश हुई, जो...
नई दिल्ली: दुनिया अल नीनो के ज़बरदस्त असर को देख रही है। यह एक ऐसी समुद्री व मौसमी गतिविधि है, जो पूरी दुनिया के मौसम चक्र को उलट-पुलट कर सकती है। स्पेनिश भाषा में 'अल नीनो' का अर्थ "छोटा लड़का" (Little Boy) होता है। सबसे पहले 1600 के दशक में दक्षिण अमरीकी मछुआरों ने देखा कि समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे मछलियां गायब हो जाती हैं और भारी बारिश व तूफ़ान आते हैं। यह स्थिति अक्सर क्रिसमस के आसपास बनती थी, लेकिन अब बीते कुछ दशकों में इसका दायरा और समय काफी बढ़ गया है। आमतौर पर इसका असर दिसंबर में चरम पर होता है, लेकिन इस बार यह समय से पहले ही खतरनाक रूप ले चुका है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, अल नीनो की वजह से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम में असामान्य और चरम बदलाव देखे गए हैं - जहां चिली के अटाकामा रेगिस्तान में फूल खिले, वहीं जापान की राजधानी टोक्यो में लगातार 35 दिनों तक बारिश हुई, जो 1886 के बाद से सबसे लंबा दौर था।
अटाकामा रेगिस्तान में बहार-
प्रशांत महासागर और एंडीज पर्वत श्रृंखला के बीच चिली में लगभग 1,600 किलोमीटर में फैला अटाकामा रेगिस्तान दुनिया के सबसे सूखे इलाकों में गिना जाता है। यहां सितंबर में हुई रिकॉर्ड बारिश के कारण लगभग 200 प्रजातियों के लाखों बैंगनी फूल खिल उठे। इस शानदार नज़ारे को देखने आए पर्यटकों द्वारा पोस्ट की गई तस्वीरों में धरती के सबसे सूखे (ध्रुवीय इलाकों को छोड़कर) रेगिस्तान में बैंगनी फूलों की चादर बिछी हुई दिखाई दी।
चिली के अधिकारियों (CONAF) के मुताबिक, जुलाई और अगस्त के दौरान यहां 180 मिलीमीटर से भी ज़्यादा बारिश दर्ज की गई, जो 1950 में रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक है। इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।
टोक्यो में 138 सालों का टूटा रिकॉर्ड, लगातार 35 दिन हुई बारिश
टोक्यो में लगातार 35 दिनों तक बारिश हुई, जिसने 1886 के बाद का सबसे लंबा रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले 2019 में 33 दिनों तक बारिश दर्ज की गई थी। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर महीने में यहां सामान्य से तीन गुना अधिक बारिश हुई। पूरे महीने में केवल 45.8 घंटे ही धूप देखने को मिली और 14 दिनों तक सूरज बिल्कुल नहीं निकला। इस स्थिति के कारण सब्ज़ियों के दाम आसमान छूने लगे, पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान हुआ और लोग हफ़्तों धूप देखने को तरस गए।
वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (WMO) ने चेतावनी दी है कि इस साल अक्टूबर और दिसंबर के बीच दुनिया भर में समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। UN एजेंसी ने यह भी कहा कि अल नीनो 1950 के बाद से सबसे मज़बूत अल नीनो में से एक है और यह फरवरी 2027 तक बना रहेगा।