सचिन पायलट ने CEC की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, कहा-'गलत कामों' के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं

Edited By Updated: 31 Oct, 2026 09:02 AM

sachin pilot questioned the impartiality of the cec

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया और इस पद पर बैठे व्यक्ति को मिली कानूनी छूट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर चिंताएं पैदा होती हैं। इसी बीच...

नई दिल्ली : कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया और इस पद पर बैठे व्यक्ति को मिली कानूनी छूट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर चिंताएं पैदा होती हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी CEC के खिलाफ एक 'सार्वजनिक महाभियोग कार्यवाही' (public impeachment proceeding) आयोजित करने की योजना बना रही है। 

पायलट ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पक्षपात दिखाया है और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि एक कामकाज करने वाले लोकतंत्र में यह जरूरी है कि जनता का इन संस्थाओं पर भरोसा बना रहे और उसे फिर से मजबूत किया जाए। एक साक्षात्कार में पायलट ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र किया और दावा किया कि 13.3 करोड़ लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। 

उन्होंने कहा, 'अगर मैच का अंपायर ही पक्षपाती हो, तो खेलने का क्या मतलब?' देश की संस्थाओं में अपना भरोसा जताते हुए उन्होंने आगे कहा, 'आखिरकार, हम सब भरोसे पर ही काम करते हैं। हमें सिस्टम पर भरोसा होना चाहिए। जब ​​सिस्टम पर ही सवाल उठने लगें और वह भी किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा जिस पर हमें संदेह हो कि वह निष्पक्ष नहीं है, तो फिर चुनावों में निष्पक्षता कैसे हो सकती है?' 

उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा की गई 'गलतियां' (wrongdoings) दस्तावेजी सबूतों के जरिए साबित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ज्ञानेश कुमार ने जो गलत काम किए हैं, उनके लिए पर्याप्त ठोस डेटा और दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं।' उन्होंने कहा कि यह मुद्दा एक लोकतांत्रिक गणराज्य में मतदान के मौलिक अधिकार के लिए एक चुनौती पेश करता है। मतदाता सूची से 13.3 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा, 'यह हमारे गणतंत्र के सबसे बुनियादी मुद्दे (यानी वोट देने के अधिकार) के सामने एक बड़ी चुनौती है।' 

पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार संसद में उठाए गए किसी भी सवाल या शंका का जवाब देने में नाकाम रही है। उन्होंने संसद के कई सत्रों से चले आ रहे इस गतिरोध के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष और भारत की जनता को जवाब नहीं दे पाई है, जिससे इन मुद्दों को उठाना और भी जरूरी हो गया है। कांग्रेस नेता ने कहा, 'जब संसद के भीतर सवाल पूछे जाते हैं, तो उनका कोई जवाब नहीं दिया जाता इसलिए, भारत के लोगों और विपक्ष के लिए इन मुद्दों को सार्वजनिक पटल पर उठाना बिल्कुल उचित है... एक राजनीतिक दल के तौर पर, हमें यह मुद्दा उठाने और जवाब मांगने का पूरा अधिकार है।' 

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पायलट ने कहा कि पहले की चयन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे जिससे सरकार को 2-1 का फायदा मिलता था। इंडिया गठबंधन ने शनिवार को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'सार्वजनिक महाभियोग' की प्रक्रिया चलाने की योजना बनाई है। बारिश के कारण शुक्रवार को यह सार्वजनिक महाभियोग टाल दिया गया था। रविवार को इंडिया गठबंधन ने रामलीला मैदान में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के खिलाफ मेगा रैली। 

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