Edited By Tanuja,Updated: 06 Jan, 2026 01:02 PM

मेक्सिको ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए देश में किसी भी अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की आशंका से इनकार किया है। राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबॉम ने कहा कि अमेरिका के साथ सहयोग जारी है और संगठित अपराध का समाधान विदेशी सैन्य...
International Desk: वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या अमेरिका अब मेक्सिको में मादक पदार्थ तस्करी गिरोहों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कर सकता है। हालांकि मेक्सिको सरकार और विशेषज्ञों ने इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही मेक्सिको को ड्रग कार्टेल्स के मुद्दे पर चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबॉम ने साफ कहा है कि किसी भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का खतरा नहीं है। शीनबॉम ने सोमवार को कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई जोखिम है। अमेरिकी सरकार के साथ समन्वय और सहयोग कायम है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठित अपराध की समस्या का समाधान विदेशी सैन्य हस्तक्षेप से नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की धमकियों को मेक्सिको से और अधिक रियायतें हासिल करने की रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए। हालांकि कोई भी यह पूरी तरह नकारने को तैयार नहीं है कि ट्रंप कोई अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं। मेक्सिको और वेनेजुएला की स्थिति को एक जैसा नहीं माना जा रहा। पहला बड़ा अंतर यह है कि क्लॉडिया शीनबॉम एक लोकप्रिय और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई राष्ट्रपति हैं। दूसरा, मेक्सिको अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है और अमेरिका में लगभग चार करोड़ मेक्सिकन नागरिक रहते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी स्वीकार कर चुके हैं कि मेक्सिको के साथ अमेरिका का उच्च-स्तरीय सहयोग जारी है।
मेक्सिको के सेंटर फॉर इकनॉमिक रिसर्च एंड टीचिंग (CIDE) के राजनीतिक विश्लेषक कार्लोस पेरेज रिकार्ट के अनुसार, “अगर अमेरिका मेक्सिको में हस्तक्षेप करता है, तो दोनों देशों के बीच सहयोग खत्म हो जाएगा। यह अमेरिका के लिए बड़ा जोखिम होगा।” हालांकि अमेरिका में मेक्सिको के पूर्व राजदूत अर्टुरो सारुखान का कहना है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो का समर्थन करना मेक्सिको को भारी पड़ सकता है। वहीं, पूर्व राजदूत मार्था बार्सेना ने कहा कि मेक्सिको के सामने अब भी सबसे बड़ी चुनौती संगठित अपराध से जुड़ा राजनीतिक भ्रष्टाचार है। फिलहाल, अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की संभावना बेहद कम मानी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के दौर में किसी भी विकल्प को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।