Edited By Tanuja,Updated: 27 Oct, 2025 07:38 PM

मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता बढ़ी है। कट्टरपंथी संगठन 15 नवंबर को रैली निकालकर अहमदिया मुसलमानों को “गैर-मुस्लिम” घोषित करने की मांग करेंगे। धर्मगुरुओं की खुलेआम हत्या की धमकियों से अहमदिया समुदाय में दहशत फैल गई...
Dhaka: नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के शासनकाल में बांग्लादेश तेजी से धार्मिक उग्रवाद की ओर बढ़ रहा है। अब देश के कट्टरपंथी इस्लामी संगठन अहमदिया मुसलमानों को “गैर-मुस्लिम” घोषित करने की मांग को लेकर 15 नवंबर को राजधानी ढाका में एक विशाल रैली आयोजित करने जा रहे हैं। यह वही रास्ता है जो 1974 में पाकिस्तान ने अपनाया था, जब वहां अहमदियों से मुसलमानों का दर्जा छीन लिया गया था।
यूनुस सरकार में बढ़ा अल्पसंख्यकों पर अत्याचार
अगस्त 2024 में मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं और अहमदिया मुसलमानों पर हमले लगातार बढ़े हैं। कट्टरपंथियों को खुली छूट मिली हुई है और सरकार इस पर चुप्पी साधे बैठी है। धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों का सिलसिला अब खुले तौर पर धमकियों तक पहुंच गया है।
‘जहां मिले कादियानी, मार डालो’
प्रसिद्ध बांग्लादेशी धर्मगुरु मुफ्ती इनायतुल्लाह अब्बासी ने हाल ही में खुले मंच से कहा “जहां कहीं भी कादियानी (अहमदिया) मिलें, उन्हें मार दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि अगर सरकार अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित नहीं करती, तो “सड़कों से नहीं, बल्कि संसद पर कब्जा करके यह कानून बनवाया जाएगा।”
पाकिस्तान जैसे हालात बनने की आशंका
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 नवंबर की इस रैली में दारुल उलूम देवबंद, पाकिस्तानी मौलाना और बांग्लादेश के कई कट्टर नेता शामिल होंगे। सभी यूनुस सरकार पर दबाव डालेंगे कि वह अहमदिया मुसलमानों को इस्लाम से बाहर कर दे। यह आंदोलन पाकिस्तान की तरह ही ‘धर्म की रक्षा’ के नाम पर नफरत फैलाने की कोशिश है।
डरे-सहमे अहमदिया मुसलमान
करीब एक लाख की आबादी वाला अहमदिया समुदाय अब दहशत में है। समुदाय के एक सदस्य ने इंडिया टुडे डिजिटल से कहा, “हमें डर है कि 15 नवंबर की रैली से पहले ही हमारे खिलाफ नरसंहार शुरू हो सकता है। कट्टरपंथी हर जगह हैं और पुलिस कुछ नहीं कर रही।” अहमदिया आंदोलन की शुरुआत 1889 में मिर्जा गुलाम अहमद ने भारत के कादियान (गुरदासपुर) में की थी। लेकिन 1974 में पाकिस्तान की संसद ने उन्हें गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया। तब से वहां उनकी मस्जिदें तोड़ी जाती हैं, कुर्बानी और नमाज़ पर रोक लगाई जाती है और हत्याएं आम बात हो गई हैं। अब बांग्लादेश भी उसी राह पर चलता दिख रहा है। अहमदिया मुस्लिम जमात बांग्लादेश के विदेश सचिव अहमद तबशीर चौधरी ने बताया, “हम इस साल फरवरी में पंचगढ़ में अपना वार्षिक जलसा नहीं कर सके। प्रशासन ने हमें धमकी दी थी, इसलिए हमें ढाका में सीमित रूप से कार्यक्रम करना पड़ा।” उन्होंने कहा कि यूनुस सरकार में असहिष्णुता तेजी से बढ़ रही है।