Edited By Pardeep,Updated: 30 Oct, 2026 11:15 PM

एक विवादास्पद इस्राइली-अमेरिकी रब्बाई योज़ेफ (योसी) मिज़राही द्वारा हिंदू धर्म और गोपूजा का मज़ाक उड़ाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारत और इस्राइल सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आक्रोश फैल गया है। अमेरिका में रहकर ऑनलाइन धार्मिक...
यरूशलम/नई दिल्ली: एक विवादास्पद इस्राइली-अमेरिकी रब्बाई योज़ेफ (योसी) मिज़राही द्वारा हिंदू धर्म और गोपूजा का मज़ाक उड़ाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारत और इस्राइल सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आक्रोश फैल गया है। अमेरिका में रहकर ऑनलाइन धार्मिक मंच 'डिवाइन इंफॉर्मेशन' चलाने वाले मिज़राही ने अपने एक प्रवचन के दौरान हिंदू परंपराओं, भारतीय डॉक्टरों और सड़कों पर गायों की मौजूदगी को लेकर अमर्यादित और नस्लवादी टिप्पणियां की हैं।
गोपूजा, भारतीय डॉक्टरों और परंपराओं पर कसे तंज
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो क्लिप में रब्बाई मिज़राही एक भारतीय व्यक्ति का ज़िक्र करते हुए कहता है कि हिंदू परिवार गायों की पूजा करते हैं। उसने दावा किया कि लोग फर्श से गोमूत्र चाटते हैं और इसे दवा दुकानों से खरीदते हैं।
इतना ही नहीं, उसने दिल्ली के अस्पतालों और डॉक्टरों का उपहास उड़ाते हुए कहा कि इलाज करने वाले डॉक्टर भी गोमूत्र का सेवन करते हैं। दिल्ली की सड़कों पर बैठी गाय का ज़िक्र करते हुए उसने "सुजी" नाम की गाय का मज़ाक उड़ाया और अंत में भगवान का आभार जताते हुए कहा कि "हमें उनके जैसा न बनाने के लिए धन्यवाद"।
इस्राइली शोधकर्ता ने बोला हमला: "इस्राइल की साख को पहुंचाया भारी नुकसान"
इस अमर्यादित वीडियो के वायरल होने के बाद भारत और इस्राइल दोनों देशों के लोगों ने मिज़राही को आड़े हाथों लिया है। भारत में अध्ययन कर रहे इस्राइली शोधकर्ता और लेखक येशया रोसेनमैन ने मिज़राही की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उसकी हरकतों से इस्राइल की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को "अकल्पनीय नुकसान" पहुंचा है।
रोसेनमैन ने कहा कि मिज़राही का गैर-यहूदियों, ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों और कैंसर मरीजों के प्रति अपमानजनक बयान देने का पुराना इतिहास रहा है। उन्होंने मांग की कि जैसे ब्रिटेन ने मिज़राही के प्रवेश पर रोक लगाने की तैयारी की थी, वैसे ही इस्राइल को भी भविष्य में उसके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
फलस्तीनी राजदूत बोले—"नस्लवाद मानवता के लिए खतरा"
भारत में फलस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने भी बिना नाम लिए इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने एक्स (X) पर लिखा कि जो लोग किसी धर्म या विश्वास के लोगों के खिलाफ नफरत भड़काते हैं और उनकी धार्मिक परंपराओं का मज़ाक उड़ाते हैं, वे केवल असहिष्णुता नहीं फैला रहे, बल्कि साझा मानवता की नींव को खतरे में डाल रहे हैं। सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी रब्बाई की टिप्पणियों को "नस्लवादी मतिभ्रम" और "नस्लवादी साइकोपैथ" करार दिया है।
होलोकॉस्ट denial से लेकर यूके में बैन तक; विवादों से पुराना नाता
इस्राइल में जन्मे और अमेरिका में सक्रिय रब्बाई योसी मिज़राही का विवादों से पुराना नाता रहा है:
- होलोकॉस्ट पर झूठा दावा: दिसंबर 2015 में उसने दावा किया था कि होलोकॉस्ट में 60 लाख के बजाय केवल 10 लाख से कम यहूदी मारे गए थे, जिसे इतिहासकारों ने खारिज कर दिया था और बाद में मिज़राही को माफी मांगनी पड़ी थी।
- बीमारियों पर आपत्तिजनक बयान: उसने ऑटिज्म और डाउन सिंड्रोम जैसी स्थितियों को पूर्व जन्मों के पापों की सजा बताया था।
- धार्मिक गुरुओं द्वारा निंदा: दिसंबर 2016 में 16 रूढ़िवादी यहूदी रब्बियों ने उसके उपदेशों को खतरनाक और आपत्तिजनक बताते हुए निंदा की थी।
- ब्रिटेन में प्रवेश पर रोक: मार्च 2019 में ब्रिटेन में उसके बोलने के दौरे पर वहां के अधिकारियों द्वारा रोक लगाने की रिपोर्ट आई थी, जिसके बाद उसने यात्रा रद्द कर दी थी।
उल्लेखनीय है कि भारत और इस्राइल के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध हैं और भारत में यहूदी समुदाय पिछले 2,000 से अधिक वर्षों से बिना किसी यहूदी-विरोधी भावना (Antisemitism) के शांतिपूर्ण ढंग से रह रहा है। ऐसे में इस विवादास्पद बयान की चौतरफा निंदा हो रही है।